बुधवार को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) की कार्यप्रणाली पर आयोजित खुली बहस के दौरान भारत ने आतंकी संगठनों एवं उनके सरगनाओं को प्रतिबंधित सूची में शामिल करने अथवा हटाने की प्रक्रिया में निष्पक्षता और पूर्ण पारदर्शिता लाने की मांग उठाई।
संयुक्त राष्ट्र में भारत के मिशन की प्रभारी राजनयिक योजना पटेल ने कहा कि सुरक्षा परिषद के मंच का इस्तेमाल संकीर्ण राजनीतिक स्वार्थों को साधने के लिए नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने रेखांकित किया कि बिना किसी पुख्ता दस्तावेज या वस्तुनिष्ठ मानकों के किसी संगठन को आतंकवादी घोषित करना अथवा सूची से बाहर कर आतंकियों को वैधता प्रदान करना परिषद की साख को प्रभावित करता है।
राजनयिक ने आतंकवाद से संबंधित सुरक्षा परिषद की सहायक समितियों के प्रमुखों के चयन में हो रहे विलंब पर भी चिंता व्यक्त की। उन्होंने बताया कि राजनीतिक मतभेदों की वजह से पिछले आठ महीनों से यह प्रक्रिया बाधित है। भारत ने आग्रह किया कि इन समितियों के अध्यक्षों की नियुक्ति बिना किसी अतिरिक्त देरी के एक तय समयसीमा के भीतर पूरी की जानी चाहिए।
इसके अलावा, भारत ने संयुक्त राष्ट्र शांति मिशनों में अपने सैन्य और पुलिस बल भेजने वाले देशों को नीतिगत फैसलों में अधिक हिस्सेदारी देने की बात कही। भारत का कहना है कि ये देश इन अभियानों के प्रमुख हितधारक हैं, इसलिए मिशनों के जनादेश निर्धारण और संसाधन आवंटन जैसे अहम निर्णयों में उनकी सक्रिय भागीदारी आवश्यक है।
सुरक्षा परिषद की वर्तमान व्यवस्था को पुराना बताते हुए भारत ने इसमें व्यापक और संरचनात्मक सुधारों का आह्वान किया। भारत ने स्पष्ट किया कि परिषद का विस्तार स्थायी और गैर-स्थायी दोनों ही श्रेणियों में होना चाहिए और इस सुधार प्रक्रिया को स्पष्ट लक्ष्यों तथा निश्चित समयसीमा के तहत आगे बढ़ाया जाना जरूरी है।