अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक साक्षात्कार में स्पष्ट किया है कि अमेरिका ईरान से जुड़े प्रमुख जलमार्गों पर नियंत्रण हासिल करने के बेहद करीब है और तेहरान को परमाणु हथियार प्राप्त करने की अनुमति कभी नहीं दी जाएगी।
साक्षात्कार में राष्ट्रपति ने बी-2 बॉम्बर से किए गए सटीक हमलों को उचित ठहराया। ट्रंप ने दावा किया कि अभियान के समय ईरान परमाणु हथियार बनाने से मात्र दो सप्ताह की दूरी पर था। उन्होंने जोर देकर कहा कि यदि यह सैन्य कदम न उठाया गया होता तो इजरायल का अस्तित्व मिट सकता था और खाड़ी क्षेत्र के प्रमुख देश—सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात, कतर, कुवैत तथा बहरीन—ईरानी मिसाइल हमलों के गंभीर खतरे में आ जाते।
सैन्य स्थिति का विवरण देते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि हमलों के बाद ईरान की मिसाइल, ड्रोन उत्पादन और समग्र रक्षा संरचना ध्वस्त हो चुकी है। ट्रंप के अनुसार, ईरानी नेतृत्व के बिखर जाने के कारण इस समय किसी कूटनीतिक समाधान पर पहुंचना जटिल हो गया है। इसके साथ ही उन्होंने ईरान की गिरती अर्थव्यवस्था, मुद्रा संकट और सैन्य बलों के लंबित वेतन का हवाला देते हुए तेहरान पर बढ़ते दबाव को रेखांकित किया।
अमेरिकी नागरिकों पर पड़ने वाले वित्तीय प्रभाव के संबंध में ट्रंप ने कहा कि इस अभियान के परिणामस्वरूप पेट्रोल और ऊर्जा की दरों में मामूली इजाफा संभव है। हालांकि, उन्होंने दोहराया कि राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा के व्यापक हित में ईरान की परमाणु महत्वाकांक्षाओं को समाप्त करने के लिए यह खर्च पूरी तरह तर्कसंगत है।
साक्षात्कार के अंत में ट्रंप ने आर्थिक मोर्चे पर बात करते हुए दावा किया कि आयात शुल्क नीतियों की बदौलत ऑटो, चिप और चिकित्सा उपकरण विनिर्माण में देश के भीतर ऐतिहासिक निवेश हो रहा है। उल्लेखनीय है कि इस चर्चा का संचालन करने वाले माइकल कोहेन पूर्व में ट्रंप के करीबी कानूनी सलाहकार थे, किंतु बाद में दोनों के बीच सार्वजनिक मतभेद उभर आए थे और कोहेन ने उनके खिलाफ गवाही दी थी।