रविवार को ताशकंद में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उज्बेकिस्तान के राष्ट्रपति शौकत मिर्जियोयेव के बीच द्विपक्षीय वार्ता संपन्न हुई। संयुक्त प्रेस वक्तव्य के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने उज्बेकिस्तान की भौगोलिक और रणनीतिक स्थिति को रेखांकित करते हुए उसे समूचे मध्य एशियाई क्षेत्र में भारत की साझेदारी का केंद्र बिंदु करार दिया। उन्होंने कहा कि दोनों देशों की विकास नीतियां युवाओं, आधुनिक तकनीक और समावेशी विकास पर आधारित हैं।
आपसी सहयोग को नई गति देने के लिए दोनों देशों ने वर्ष 2026 में रणनीतिक साझेदारी के 15 वर्ष पूरे होने पर अपने द्विपक्षीय संबंधों को ‘व्यापक रणनीतिक साझेदारी’ का स्वरूप देने का फैसला किया है। आर्थिक संबंधों को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से दोनों नेताओं ने आपसी व्यापार को मौजूदा 1 बिलियन डॉलर से बढ़ाकर 2030 तक 5 बिलियन डॉलर करने का लक्ष्य तय किया। इस उद्देश्य के तहत बैंकिंग, भुगतान प्रणालियों, बेहतर कनेक्टिविटी और बाजार पहुंच में सुधार लाने पर सहमति बनी।
सुरक्षा के मोर्चे पर दोनों देशों ने साझा संकल्प व्यक्त किया कि आतंकवाद, उग्रवाद और क्षेत्रीय अलगाववाद से निपटने में कोई ढिलाई नहीं बरती जाएगी। रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता और तकनीकी सहयोग को गति देने के लिए दोनों देशों के रक्षा उद्योगों के बीच सीधे संपर्क, संयुक्त विनिर्माण और विकास को बढ़ावा दिया जाएगा।
इसके साथ ही, दोनों देशों ने पारंपरिक चिकित्सा में सहयोग बढ़ाने और आपसी रिश्तों का दायरा दोनों देशों के विभिन्न राज्यों व शहरों तक विस्तृत करने की योजना बनाई है। इससे पर्यटन, शिक्षा, शहरी प्रबंधन और सांस्कृतिक आदान-प्रदान को बल मिलेगा। अपनी इस चौथी यात्रा पर प्रधानमंत्री मोदी ने राष्ट्रपति मिर्जियोयेव के दूरदर्शी नेतृत्व और भारत के प्रति उनकी निरंतर प्रतिबद्धता की प्रशंसा करते हुए द्विपक्षीय संबंधों के निरंतर विस्तार पर विश्वास जताया।