केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जे. पी. नड्डा ने मंगलवार को नई दिल्ली में स्वास्थ्य क्षेत्र के भीतर हिंदी और अन्य भारतीय भाषाओं के अधिकतम उपयोग का आह्वान किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि नागरिकों से उनकी समझ की भाषा में संवाद करने से ही स्वास्थ्य सेवाओं की सुलभता बढ़ेगी और आम जनता तक इलाज व बुनियादी सुविधाएं सुचारु रूप से पहुंच सकेंगी।
स्वास्थ्य मंत्रालय की ‘हिंदी सलाहकार समिति’ की दूसरी बैठक को संबोधित करते हुए केंद्रीय मंत्री ने कहा कि देश अब पश्चिमी प्रभाव के दौर से बाहर निकलकर अपनी पारंपरिक भाषाओं के प्रयोग को प्राथमिकता दे रहा है। भाषा को राष्ट्रीय अस्मिता और ‘भारतीयता’ का आधार बताते हुए उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विभिन्न वैश्विक सम्मेलनों में अपने विचार हिंदी में रखकर भारतीय पहचान को वैश्विक पटल पर सुदृढ़ किया है।
बैठक में मंत्रालय और उसके अधीनस्थ दफ्तरों में राजभाषा नीति के क्रियान्वयन, अब तक हासिल प्रगति तथा भविष्य की कार्ययोजना का विस्तृत जायजा लिया गया। जे. पी. नड्डा ने मंत्रालय के अधीन राजभाषा से जुड़े सभी पदों की समीक्षा करने और खाली पदों को समयबद्ध तरीके से भरने के कड़े निर्देश दिए। उन्होंने अधिकारियों को रिक्तियों का पूरा विवरण शीघ्र एकत्र करने को कहा, जिससे मामला वित्त मंत्रालय के समक्ष उठाया जा सके।
अधिकारियों और कर्मचारियों की भाषाई दक्षता निखारने के लिए उन्होंने एक सप्ताह का संक्षिप्त प्रशिक्षण पाठ्यक्रम या वर्कशॉप आयोजित करने का प्रस्ताव दिया, जिसकी दैनिक कार्ययोजना पूर्व-निर्धारित हो।
विभागीय संचार माध्यमों को लेकर उन्होंने सुझाव दिया कि मंत्रालय द्वारा निकाली जाने वाली पत्रिकाओं में न्यूनतम आधे आलेख हिंदी में अनिवार्य रूप से होने चाहिए और बुलेटिनों में भी इसकी उपस्थिति अधिक होनी चाहिए। भोपाल मेडिकल कॉलेज द्वारा हिंदी में मेडिकल पाठ्यक्रम संचालित किए जाने के उदाहरण पर उन्होंने कहा कि इस पहल का व्यवस्थित अध्ययन होना चाहिए ताकि इसे अन्य चिकित्सा महाविद्यालयों में भी दोहराया जा सके। समिति की इससे पूर्व की बैठक 22 अगस्त 2025 को राजधानी में संपन्न हुई थी।