मध्य प्रदेश को ड्रोन निर्माण, परीक्षण, अनुसंधान और नवाचार का देश में प्रमुख केंद्र बनाने के उद्देश्य से विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के अधीन कार्यरत एमपीएसईडीसी द्वारा आईआईएसईआर भोपाल में उद्योग जगत के प्रतिनिधियों के साथ एक उच्चस्तरीय राउंडटेबल बैठक आयोजित की गई। इस परिचर्चा में विभाग के प्रमुख सचिव एम. सेल्वेंद्रन ने सहभागिता करते हुए राज्य में ड्रोन क्षेत्र के समग्र विकास, निवेश आकर्षण और नवाचार को गति देने के लिए शासन की प्राथमिकताओं को रेखांकित किया।
इस औद्योगिक संवाद में गरुड़, डीएफआई, आइडियाफोर्ज, एनएफएसयू, प्रखर और आईजेडआई जैसी देश की प्रतिष्ठित ड्रोन निर्माता कंपनियों, अनुसंधान संस्थानों और नवाचार स्टार्टअप्स के प्रतिनिधि शामिल हुए। परिचर्चा के दौरान विशेषज्ञों ने राज्य में ड्रोन विनिर्माण, टेस्टिंग और सर्टिफिकेशन का एक सशक्त माहौल तैयार करने के संबंध में कई महत्वपूर्ण सुझाव प्रस्तुत किए।
बैठक के दौरान प्रतिभागियों ने आईआईएसईआर भोपाल में प्रस्तावित ‘ड्रोन टेक्नोलॉजी सेंटर ऑफ एक्सीलेंस’ की स्थापना के निर्णय की सराहना की। जुलाई 2026 में राज्य मंत्रिमंडल द्वारा करीब 85.51 करोड़ रुपये की लागत से इस केंद्र को मंजूरी दी गई थी। यह केंद्र मुख्य रूप से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), ऑटोनॉमस सिस्टम्स, डिजिटल ट्विन्स, सिमुलेशन और यूएवी डिजाइनिंग जैसी अत्याधुनिक विधाओं पर केंद्रित रहेगा, जिससे प्रोटोटाइप परीक्षण और नए स्टार्टअप्स के इनक्यूबेशन को तकनीकी संबल मिलेगा।
इसके साथ ही ग्वालियर में आकार लेने जा रहे ड्रोन मैन्युफैक्चरिंग एंड टेस्टिंग क्लस्टर के विकास पर भी विस्तृत बातचीत हुई। इस क्लस्टर के माध्यम से कॉमन मैन्युफैक्चरिंग, कंपोनेंट टेस्टिंग लैब्स और फ्लाइट टेस्टिंग के लिए एकीकृत ढांचा विकसित किया जाएगा। उद्योग जगत के कई प्रतिनिधियों ने विनिर्माण, पायलट प्रोजेक्ट्स और तकनीकी कौशल विकास के क्षेत्र में मध्य प्रदेश के साथ दीर्घकालिक साझेदारी में रुचि जताई।
राउंडटेबल से प्राप्त इन सभी सुझावों को प्रदेश के आगामी ड्रोन रोडमैप में शामिल किया जाएगा, ताकि उच्च मूल्य वाले रोजगार और नए निवेश को आकर्षित किया जा सके। बैठक में ‘मध्यप्रदेश ड्रोन प्रमोशन एंड यूसेज पॉलिसी-2025’ की भूमिका को भी महत्वपूर्ण माना गया, जिसका उद्देश्य कृषि, लॉजिस्टिक्स, आपदा प्रबंधन, औद्योगिक अनुप्रयोगों और सुशासन में ड्रोन तकनीक के उपयोग को जमीनी स्तर पर विस्तार देना है।