विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने शुक्रवार को नई दिल्ली में ब्राजील के विदेश मंत्री माउरो विएरा के साथ उच्चस्तरीय द्विपक्षीय वार्ता की। इस बैठक में दोनों देशों के आपसी संबंधों को प्रगाढ़ करने के साथ-साथ संयुक्त राष्ट्र, जी20 और अंतरराष्ट्रीय समुद्री संगठन (आईएमओ) जैसे प्रमुख वैश्विक मंचों पर सहयोग के तौर-तरीकों की समीक्षा की गई। इसके अलावा मौजूदा भू-राजनीतिक परिदृश्य और कूटनीतिक संवाद को गति देने में ब्रिक्स 2026 की भूमिका पर भी विस्तार से बात हुई।
बैठक के बाद एस. जयशंकर ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर जानकारी साझा करते हुए बताया कि ब्राजीलियाई समकक्ष के साथ रणनीतिक क्षेत्रों पर सार्थक चर्चा हुई। इस संवाद के केंद्र में व्यापार, निवेश, रक्षा, ऊर्जा, कृषि और अंतरिक्ष जैसे अहम क्षेत्र शामिल रहे। दोनों पक्षों ने साझा हितों से जुड़े वैश्विक मंचों पर अपनी भागीदारी को और अधिक प्रभावी बनाने पर सहमति जताई।
मौजूदा वैश्विक हालात के संदर्भ में दोनों नेताओं ने कूटनीति और संवाद को प्राथमिकता देने पर जोर दिया। भारत की अध्यक्षता में होने वाले ब्रिक्स 2026 के महत्व को रेखांकित करते हुए भारतीय विदेश मंत्री ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय चुनौतियों के समाधान और ‘ग्लोबल साउथ’ की आवाज को दुनिया भर में प्रभावी ढंग से उठाने में इस समूह की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण साबित होगी।
ब्राजील के विदेश मंत्री माउरो विएरा 12 और 13 सितंबर को आयोजित होने वाले 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में शामिल होने के लिए गुरुवार को ही भारत पहुंचे थे। उनके आगमन पर भारतीय विदेश मंत्रालय ने उनका स्वागत करते हुए दोनों राष्ट्रों के बीच की ऐतिहासिक और गहरी साझेदारी को याद किया तथा ग्लोबल साउथ के देशों के बीच समन्वय बढ़ाने की साझा प्रतिबद्धता दोहराई।
वर्तमान में ब्रिक्स समूह 11 देशों का एक मजबूत मंच है, जिसमें भारत, ब्राजील, रूस, चीन, दक्षिण अफ्रीका, मिस्र, इथियोपिया, इंडोनेशिया, ईरान, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात शामिल हैं। इसके अतिरिक्त बेलारूस, क्यूबा, बोलीविया, कजाकिस्तान, मलेशिया, नाइजीरिया, थाईलैंड, युगांडा, उज्बेकिस्तान और वियतनाम इसके भागीदार देशों की सूची में हैं। इस बार के सम्मेलन में सदस्य राष्ट्रों के अलावा विशेष आमंत्रित और साझेदार देशों के प्रतिनिधि भी भाग ले रहे हैं।
गौरतलब है कि इससे पूर्व फरवरी माह में ब्राजील के राष्ट्रपति लुइज इनासियो लूला दा सिल्वा भारत के राजकीय दौरे पर पहुंचे थे। उस दौरान उन्होंने दूसरे एआई इम्पैक्ट समिट में शिरकत की थी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ द्विपक्षीय बैठक की थी। उस उच्चस्तरीय वार्ता में दोनों देशों ने अर्थव्यवस्था, व्यापार, निवेश, शिक्षा, डिजिटल तकनीक और बहुपक्षीय विषयों पर आपसी सहयोग को नई दिशा देने पर बल दिया था।