रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने शनिवार को 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन को संबोधित करते हुए स्पष्ट किया कि सीमित देशों के प्रभुत्व वाली एक-ध्रुवीय वैश्विक व्यवस्था अब अप्रासंगिक हो चुकी है। क्रेमलिन द्वारा जारी उनके आधिकारिक वक्तव्य के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शक्ति का संतुलन तेजी से बदल रहा है और वर्तमान समय बहुध्रुवीय (मल्टी-पोलर) व्यवस्था की मांग करता है। इस दौरान उन्होंने ब्रिक्स समूह के बढ़ते दायरे और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के विस्तार पर जोर दिया।
राष्ट्रपति पुतिन ने रेखांकित किया कि वैश्विक शक्ति का केंद्र अब पूर्व और ‘ग्लोबल साउथ’ के उभरते विकासशील देशों की ओर स्थानांतरित हो रहा है। उन्होंने कहा कि संकीर्ण हितों पर आधारित पुरानी व्यवस्था अब समाप्त हो रही है, क्योंकि विश्व के अनेक राष्ट्र अपने संप्रभु हितों की सुरक्षा और वैश्विक समस्याओं के समाधान में सक्रिय भागीदारी निभाने के लिए पूरी तरह तत्पर हैं।
बहुध्रुवीय ढांचे के निर्माण की राह में आने वाली बाधाओं का उल्लेख करते हुए रूसी राष्ट्रपति ने कहा कि यह प्रक्रिया आसान नहीं है। औपनिवेशिक सोच में जकड़ी शक्तियां, जो दुनिया को विशिष्ट और गैर-विशिष्ट वर्गों में विभाजित देखती हैं, इस बदलाव का विरोध कर रही हैं। दूसरों के संसाधनों पर निर्भर रहने वाली ऐसी ताकतें उभरते प्रतिस्पर्धियों को रोकने का हरसंभव प्रयास करती हैं।
ब्रिक्स की बढ़ती भूमिका पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि यह संगठन अब एक विशाल मंच बन चुका है। समूह के पास उत्कृष्ट बौद्धिक और तकनीकी क्षमता उपलब्ध है, जो इसकी प्रमुख ताकत है। उन्होंने आगे कहा कि समानता, परस्पर सम्मान, अच्छे पड़ोसी जैसे संबंध और सांस्कृतिक विविधता का आदर ब्रिक्स के आधारभूत सिद्धांत हैं, जिससे वैश्विक स्तर पर इसकी साख लगातार मजबूत हुई है।
रूसी राष्ट्रपति के अनुसार, वैश्विक शासन प्रणाली में ब्रिक्स एक निर्णायक केंद्र बनकर उभरा है। सुरक्षा, राजनीति, वित्त, अर्थव्यवस्था और मानवीय मामलों से जुड़े भविष्य के कई वैश्विक निर्णय इस मंच की एकजुटता पर निर्भर करते हैं। सदस्य देश इन सभी प्रमुख क्षेत्रों में अपने साझा सहयोग को निरंतर प्रगाढ़ कर रहे हैं।
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के सुधारों का समर्थन करते हुए पुतिन ने कहा कि संस्था को अधिक प्रभावी बनाने के लिए एशिया, अफ्रीका और लैटिन अमेरिका के देशों को सुरक्षा परिषद में उचित प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए। संबोधन के अंत में उन्होंने नई दिल्ली में आयोजित सम्मेलन की सराहना करते हुए सफल आयोजन के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भारतीय सहयोगियों के प्रति आभार व्यक्त किया।