पश्चिम एशिया में गहराते सैन्य संकट के कारण वैश्विक स्तर पर ऊर्जा आपूर्ति बाधित होने के डर से सोमवार को अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में जोरदार तेजी दर्ज की गई। इस हलचल के बीच ब्रेंट क्रूड का भाव 107 डॉलर प्रति बैरल के आंकड़े को पार कर गया।
वायदा कारोबार में नवंबर डिलीवरी वाले ब्रेंट क्रूड में 3.20 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज हुई और यह 107.82 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया। वहीं, अमेरिकी बेंचमार्क वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (डब्ल्यूटीआई) के अक्टूबर अनुबंध में भी 3.20 फीसदी की तेजी आई और यह 103.2 डॉलर प्रति बैरल पर बंद हुआ। बीते सप्ताह से शुरू हुई इस मजबूती ने दोनों प्रमुख बेंचमार्क को एक बार फिर 100 डॉलर के मनोवैज्ञानिक स्तर के पार पहुंचा दिया है।
अंतरराष्ट्रीय कमोडिटी बाजार की नजर फारस की खाड़ी और लाल सागर के समुद्री परिवहन मार्गों की सुरक्षा पर टिकी हुई है। हूती बलों की ओर से महत्वपूर्ण बंदरगाहों पर नियंत्रण स्थापित किए जाने के बाद इन प्रमुख जलमार्गों पर जहाजों की आवाजाही बुरी तरह प्रभावित हुई है। यह पूरा समुद्री क्षेत्र अंतरराष्ट्रीय तेल व्यापार के बहुत बड़े हिस्से के परिवहन के लिए अनिवार्य माना जाता है।
कीमतों में हालिया उछाल उन सूचनाओं के सामने आने के बाद आया है, जिनके मुताबिक ड्रोन हमलों के मद्देनजर सऊदी अरब ने अपनी महत्वपूर्ण ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन का संचालन अस्थायी रूप से रोक दिया है। इसके साथ ही, रविवार को होर्मुज जलडमरूमध्य में एक व्यापारिक पोत पर हमला किया गया, जिसमें ईरानी अधिकारियों के अनुसार एक व्यक्ति की जान चली गई और तीन लोग जख्मी हो गए।
ईरान ने इस रणनीतिक जलमार्ग पर अपनी पकड़ और सख्त कर ली है। जहाजों के आवागमन के लिए औपचारिक अनुमति अनिवार्य कर दी गई है और सेवा शुल्क वसूलने की नई व्यवस्था पर काम चल रहा है। निर्धारित नियमों का पालन न करने वाले जहाजों को हमलों का सामना करना पड़ा है। इस बीच, जलडमरूमध्य पर तेहरान के प्रभुत्व को चुनौती देने के मकसद से अमेरिका ने ईरानी तटवर्ती ठिकानों पर बमबारी की है। वहीं, ओमान ने इस जलमार्ग के भविष्य को लेकर खाड़ी देशों और ईरान के बीच प्रस्तावित वार्ता को स्थगित कर दिया है।
अगस्त की शुरुआत में दर्ज निचले स्तर से ब्रेंट क्रूड की दरों में अब तक 30 प्रतिशत से अधिक की तेजी आ चुकी है। दोनों देशों के बीच सैन्य गतिरोध खत्म करने के कूटनीतिक प्रयास नाकाम रहे हैं और अगस्त के अंत में दोबारा संघर्ष भड़कने से आपूर्ति संबंधी आशंकाएं और गहरी हो गई हैं। इसके अतिरिक्त, सऊदी अरब द्वारा ओपेक को दी गई जानकारी के अनुसार, अगस्त में उसका उत्पादन घटकर 62 लाख बैरल प्रतिदिन रह गया, जो जुलाई की तुलना में 23 प्रतिशत कम है और वर्ष 2026 का उसका सबसे निचला मासिक स्तर है। उत्पादन में यह कमी ऐसे दौर में आई है जब यमन के हूती विद्रोही सऊदी अरब के पश्चिमी तटीय तेल निर्यात को निशाना बनाने की चेतावनी दे चुके हैं।
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