विदेश मंत्री एस. जयशंकर और वियतनाम के विदेश मंत्री ले होआई ट्रुंग ने सोमवार को राष्ट्रीय राजधानी नई दिल्ली में भारत-वियतनाम संयुक्त आयोग के 19वें सत्र की संयुक्त रूप से अध्यक्षता की। इस बैठक में दोनों राष्ट्रों के बीच राजनीतिक, रक्षा एवं सुरक्षा साझेदारी को नई मजबूती देने, भारतीय रक्षा उत्पादों की आपूर्ति का दायरा बढ़ाने तथा द्विपक्षीय व्यापार, पूंजी निवेश और आपूर्ति श्रृंखला को सुदृढ़ करने के संकल्प पर मुख्य ध्यान केंद्रित किया गया।
बैठक के निष्कर्षों को परिणाम-आधारित बताते हुए विदेश मंत्री जयशंकर ने जानकारी दी कि विचार-विमर्श के दौरान फार्मास्यूटिकल (दवाओं), समुद्री व कृषि उत्पादों को दोनों देशों के बाजारों में सुगम पहुंच दिलाने के उपायों पर बात हुई। इसके अलावा ऊर्जा क्षेत्र में सहयोग के नए आयाम तलाशने और सांस्कृतिक धरोहरों के संरक्षण से संबंधित संयुक्त परियोजनाओं को तेजी से आगे बढ़ाने पर भी सहमति व्यक्त की गई।
जयशंकर ने वियतनाम को भारत की ‘एक्ट ईस्ट’ नीति, आसियान संबंधों, हिंद-प्रशांत रणनीति, महासागर पहल और ग्लोबल साउथ के लिए एक अपरिहार्य सहयोगी करार दिया। उन्होंने कहा कि आसियान के साथ भारत के समग्र रणनीतिक गठजोड़ में वियतनाम की केंद्रीय भूमिका है। साथ ही, उन्होंने स्पष्ट किया कि इस 19वीं बैठक से दोनों पक्षों को अतीत में हस्ताक्षरित समझौतों के क्रियान्वयन का मूल्यांकन करने और शीर्ष स्तर की राजनीतिक गति को दोनों देशों के नागरिकों के लिए प्रत्यक्ष परिणामों में बदलने का आधार प्राप्त हुआ है।
वार्ता के दौरान वियतनामी विदेश मंत्री ले होआई ट्रुंग ने नई दिल्ली में 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के कामयाब आयोजन पर भारत की सराहना की। उन्होंने कहा कि यह आयोजन अंतरराष्ट्रीय समुदाय के साझा हितों को सिद्ध करने में ब्रिक्स की बढ़ती क्षमता का प्रमाण है। ट्रुंग ने भारतीय नेतृत्व के प्रयासों की प्रशंसा करते हुए सम्मेलन में अंगीकृत घोषणा-पत्र को सामयिक बताया, जिसमें वैश्विक नियमों, शांति, सुरक्षा एवं विकास के सिद्धांतों का समर्थन किया गया है।
इससे पहले शनिवार को नई दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान वियतनाम के प्रधानमंत्री ले मिन्ह हंग से मुलाकात कर द्विपक्षीय संबंधों की समीक्षा की थी। उस चर्चा में दोनों शीर्ष नेताओं ने रक्षा एवं सुरक्षा मोर्चे पर आपसी समन्वय को अधिक सशक्त करने पर विचार-विमर्श किया था, जहां प्रधानमंत्री मोदी ने वियतनाम को भारत की ‘एक्ट ईस्ट’ और ‘महासागर’ नीति का मुख्य आधार स्तंभ बताया था।