मंगलवार के कारोबारी सत्र में भारतीय शेयर बाजार में तेज गिरावट दर्ज की गई, जहां चौतरफा बिकवाली के दबाव के बीच बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का सेंसेक्स 777.94 अंक (1.04 प्रतिशत) टूटकर 74,003.82 के स्तर पर आ गया, वहीं नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी भी 279.50 अंक (1.19 प्रतिशत) फिसलकर 23,118.60 पर बंद हुआ।
कारोबार के दौरान सबसे अधिक नुकसान डिफेंस और रियल एस्टेट क्षेत्र के शेयरों में देखा गया। सेक्टोरल इंडेक्स में निफ्टी इंडिया डिफेंस 5.96 प्रतिशत की भारी गिरावट के साथ शीर्ष नुकसान दर्ज करने वाला सूचकांक रहा, जबकि निफ्टी रियल्टी में 4.04 प्रतिशत की कमजोरी आई। इसके अतिरिक्त, निफ्टी मेटल 2.54 प्रतिशत, निफ्टी कंज्यूमर ड्यूरेबल्स 2.41 प्रतिशत, निफ्टी इंडिया मैन्युफैक्चरिंग 2.40 प्रतिशत, निफ्टी पीएसई 2.29 प्रतिशत, निफ्टी पीएसयू बैंक 2.29 प्रतिशत और निफ्टी मीडिया 2.17 प्रतिशत टूटकर बंद हुए।
चौतरफा बिकवाली के इस दौर में केवल आईटी क्षेत्र ही दबाव झेलने में सफल रहा, जहां निफ्टी आईटी सूचकांक 2.19 प्रतिशत की मजबूती के साथ बढ़त दर्ज करने वाला अकेला इंडेक्स बना। वहीं दूसरी ओर, लार्जकैप शेयरों के साथ-साथ व्यापक बाजार में भी तेज गिरावट देखने को मिली। निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स 1,318.95 अंक यानी 2.12 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 60,878.25 और निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स 483.85 अंक यानी 2.43 प्रतिशत की गिरावट के साथ 19,422.45 पर आ गया।
सेंसेक्स की प्रमुख कंपनियों में एचसीएल टेक, इन्फोसिस, टेक महिंद्रा, टीसीएस, एचडीएफसी बैंक, हिंदुस्तान यूनिलीवर (एचयूएल) और टाटा स्टील बढ़त के साथ हरे निशान में बंद हुए। दूसरी तरफ, बीईएल, इंडिगो, टाइटन, बजाज फिनसर्व, महिंद्रा एंड महिंद्रा (एमएंडएम), एसबीआई, ट्रेंट, एशियन पेंट्स, बजाज फाइनेंस, इटरनल, अल्ट्राटेक सीमेंट, एक्सिस बैंक, कोटक महिंद्रा बैंक, पावर ग्रिड, आईसीआईसीआई बैंक, एलएंडटी, मारुति सुजुकी, एनटीपीसी और आईटीसी के शेयरों में गिरावट दर्ज की गई।
घरेलू बाजारों पर दबाव का प्रमुख कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की ऊंची कीमतें और वैश्विक बॉन्ड यील्ड में लगातार हो रही बढ़ोतरी रहा। इसके साथ ही, इस सप्ताह होने वाली प्रमुख केंद्रीय बैंकों की बैठकों को लेकर निवेशक सतर्क रहे, क्योंकि दुनिया की बड़ी अर्थव्यवस्थाओं द्वारा अपनी मौद्रिक नीतियों को और कड़ा किए जाने की आशंकाएं बढ़ रही हैं। विशेष रूप से अमेरिका में लंबे समय तक उच्च ब्याज दरों के बने रहने की चिंताओं ने वहां की ट्रेजरी यील्ड को कई वर्षों के शीर्ष स्तर के करीब बनाए रखा है, जिससे लगातार विदेशी निवेश की निकासी के बीच उभरते बाजारों की धारणा कमजोर बनी रही।