अमरीकी सुप्रीम कोर्ट का ट्रंप प्रशासन को झटका, मिडटर्म चुनाव के मेल-बैलेट नियमों पर लगाई रोक

अमरीकी सुप्रीम कोर्ट का ट्रंप प्रशासन को झटका, मिडटर्म चुनाव के मेल-बैलेट नियमों पर लगाई रोक

अमरीकी सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को ट्रंप प्रशासन को तगड़ा झटका देते हुए नवंबर में होने वाले मिडटर्म चुनावों के मद्देनजर मेल-बैलेट से जुड़े नए और व्यापक नियमों को लागू करने से रोक दिया है। शीर्ष अदालत ने उस आपातकालीन अपील को सीधे तौर पर खारिज कर दिया, जिसमें निचली अदालत द्वारा अमरीकी डाक सेवा के नए दिशा-निर्देशों पर लगाए गए प्रतिबंध को हटाने की मांग की गई थी।

अालतत ने अपने बिना हस्ताक्षर वाले आदेश में स्पष्ट किया कि सरकार के लिए यह साबित करना बेहद कठिन है कि जिला अदालत के शुरुआती आदेश को चुनौती देने के मामले में उसकी स्थिति मजबूत है। हालांकि इस अदालती फैसले से यह अंतिम रूप से तय नहीं हुआ है कि डाक सेवा भविष्य के चुनावों में ऐसे नियम लागू कर सकती है या नहीं, लेकिन यह साफ हो गया है कि 3 नवंबर के मिडटर्म चुनावों में इन नियमों का इस्तेमाल नहीं किया जाएगा। इन चुनावों से ही यह तय होना है कि अमरीकी कांग्रेस की प्रतिनिधि सभा और सीनेट पर किस दल का नियंत्रण रहेगा। वॉल स्ट्रीट जर्नल और वॉशिंगटन पोस्ट की रिपोर्ट्स के मुताबिक, साल 2024 में लगभग एक-तिहाई अमरीकी मतदाताओं ने डाक के माध्यम से अपने मताधिकार का प्रयोग किया था।

गौरतलब है कि डाक सेवा ने बीते अगस्त में इन नए नियमों को लागू किया था, जिसकी पृष्ठभूमि मार्च में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा हस्ताक्षरित एक कार्यकारी आदेश से जुड़ी है। इन प्रावधानों के तहत राज्यों के लिए मतपत्रों के लिफाफों का नया डिजाइन तैयार करना अनिवार्य कर दिया गया था, जिसमें चुनावी डाक के लोगो, मशीन-पठनीय फीचर्स और प्रत्येक मतदाता के लिए अलग विशेष बारकोड होना जरूरी था। साथ ही, इन डिजाइनों को संघीय मंजूरी के लिए भेजना और मतदाताओं के नाम, पते व बारकोड की जानकारी एक नए डाक पोर्टल पर अपलोड करना भी आवश्यक था। तय मानकों का पालन न करने वाली सामग्री को सीधे तौर पर अस्वीकार कर राज्य के चुनाव अधिकारियों के पास वापस भेजा जाना था।

चुनाव अधिकारियों का तर्क था कि मतदान प्रक्रिया शुरू होने के इतने करीब आकर इस तरह के बड़े बदलाव करना व्यावहारिक रूप से असंभव है। स्थिति यह थी कि नॉर्थ कैरोलिना और विस्कॉन्सिन ने पहले ही बैलेट भेजने की प्रक्रिया शुरू कर दी थी, जबकि न्यूयॉर्क टाइम्स के अनुसार, एक दर्जन से अधिक अन्य राज्य भी सप्ताह के अंत तक ऐसा करने की तैयारी में जुटे थे। अकेले नॉर्थ कैरोलिना में लगभग 3 लाख अनुपस्थित मतदाताओं के बैलेट पहले ही भेजे जा चुके थे। नॉर्थ कैरोलिना के अटॉर्नी जनरल जेफ जैक्सन ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि मतदान की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है और चुनाव के बीच में नियमों को बदला नहीं जा सकता है। दोनों प्रमुख राजनीतिक दलों के चुनाव अधिकारियों ने अदालत से 2026 के चुनाव के लिए इन नियमों को रोकने की अपील की थी, जबकि यूटा और मिशिगन के रिपब्लिकन अधिकारियों ने फैसले का स्वागत करते हुए स्थिति साफ होने की बात कही।

सुप्रीम कोर्ट के भीतर इस मामले पर बंटी हुई राय देखने को मिली। जस्टिस सैमुअल एलिटो और क्लेरेंस थॉमस ने इस फैसले पर अपनी असहमति जताई। जस्टिस एलिटो का मत था कि डाक सेवा के पास डाक वितरण को नियंत्रित करने का व्यापक अधिकार है और याचिकाकर्ता यह साबित करने में असफल रहे कि एजेंसी ने अपनी सीमाओं का उल्लंघन किया है। वहीं, बहुमत के फैसले के साथ खड़े जस्टिस ब्रेट कैवनॉ ने माना कि डाक सेवा के पास ऐसे नियम बनाने का अधिकार हो सकता है, लेकिन इस साल इन्हें लागू करना मनमाना और अनुचित होता क्योंकि स्थानीय व राज्य अधिकारियों के पास इसके लिए पर्याप्त समय नहीं था। दूसरी ओर, ट्रंप प्रशासन का पक्ष था कि ये नियम संविधान के अनुकूल हैं और चुनाव प्रक्रिया की सुरक्षा तथा विश्वसनीयता को मजबूत करते हैं, जबकि डेमोक्रेटिक शासित राज्यों और मतदान अधिकार समूहों का आरोप था कि डाक सेवा राज्यों के अधिकार क्षेत्र में दखल दे रही है।

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