प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को सेमीकॉन इंडिया के पांचवें संस्करण का उद्घाटन करते हुए कहा कि भारत सेमीकंडक्टर विनिर्माण के क्षेत्र में डिजाइनिंग के चरण से आगे बढ़कर अब व्यावसायिक (कमर्शियल) उत्पादन के स्तर तक पहुंच गया है। उन्होंने रेखांकित किया कि वर्ष 2022 में नीतियों के निर्धारण के साथ शुरू हुई यह यात्रा अब धरातल पर उतर चुकी है और भारतीय संयंत्रों में तैयार होने वाली चिप्स देश सहित दुनिया भर के उपभोक्ताओं तक पहुंचने लगी हैं।
इस अवसर पर प्रधानमंत्री ने मोहाली और सूरत स्थित दो नए प्लांट्स में व्यावसायिक उत्पादन आरंभ होने की घोषणा करते हुए संबंधित पक्षों को बधाई दी। उन्होंने बताया कि सेमीकंडक्टर मिशन के लगभग 8 बिलियन डॉलर के पहले चरण के बाद अब 13.5 बिलियन डॉलर के प्रावधान के साथ दूसरा चरण शुरू किया जा रहा है। इस मिशन के तहत अब तक 12 परियोजनाओं को मंजूरी दी जा चुकी है। नए सुधारों के तहत वैश्विक कंपनियों को भारतीय स्टार्टअप्स, घरेलू डिजाइन फर्मों और ओसीआई-स्वामित्व वाली कंपनियों के साथ साझेदारी की सुविधा भी दी गई है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत चिप डिजाइन, मैन्युफैक्चरिंग, इक्विपमेंट निर्माण, टेस्टिंग और मैटेरियल इकोसिस्टम पर एक साथ काम कर रहा है। उन्होंने देश के विशाल इंजीनियरिंग आधार को एक बड़ी शक्ति बताते हुए कहा कि चिप उद्योग के लिए 1 लाख छात्रों को प्रशिक्षित करने के लक्ष्य में से अब तक 70 हजार से अधिक युवाओं को स्किलिंग दी जा चुकी है। उन्होंने देश और विदेश में शोध कर रही युवा प्रतिभाओं के साथ-साथ उद्योग जगत से भी भारत में रिसर्च एंड डेवलपमेंट (आरएंडडी) का नेतृत्व संभालने का आह्वान किया।
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के प्रसार का उल्लेख करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि बीते दो वर्षों में वैश्विक सेमीकंडक्टर बाजार 20 प्रतिशत से अधिक की दर से बढ़ा है। एआई डेटा सेंटरों के विस्तार से उत्पन्न बिजली की मांग को देखते हुए भारत अपनी ऊर्जा सुरक्षा को चाक-चौबंद कर रहा है। उन्होंने जानकारी दी कि पिछले एक दशक में देश की स्थापित सौर ऊर्जा क्षमता 2 गीगावॉट से बढ़कर 160 गीगावॉट से अधिक हो चुकी है। इसके अलावा परमाणु ऊर्जा क्षेत्र को निजी भागीदारी के लिए खोलना, स्मॉल मॉड्यूलर रिएक्टर्स पर प्रगति और ट्रांसमिशन नेटवर्क का विस्तार सेमीकंडक्टर प्लांट्स को सतत ऊर्जा उपलब्ध कराने में सहायक सिद्ध होंगे।
वैश्विक परिप्रेक्ष्य में आपूर्ति श्रृंखलाओं के राजनीतिकरण और ‘वेपनाइजेशन’ की प्रवृत्ति पर चर्चा करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि विश्व को अब विश्वसनीय विनिर्माण केंद्रों की आवश्यकता है। संविधान के 75 वर्ष पूरे कर चुके लोकतांत्रिक भारत की इस क्षेत्र में प्रगति पूरी दुनिया की सप्लाई चेन को मजबूती प्रदान करेगी। उन्होंने हाल के घटनाक्रमों का हवाला देते हुए 7.8 प्रतिशत की तिमाही जीडीपी वृद्धि, जापानी क्रेडिट रेटिंग एजेंसी द्वारा सॉवरेन रेटिंग में सुधार, करीब 3,000 किलोमीटर के डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर के पूर्ण संचालन और ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में नई दिल्ली घोषणा की सर्वसम्मत स्वीकृति को देश की आर्थिक दृढ़ता का परिचायक बताया।