विकसित भारत के निर्माण में युवाओं की ऊर्जा और सेवा भाव निर्णायक: राज्यपाल मंगुभाई पटेल

विकसित भारत के निर्माण में युवाओं की ऊर्जा और सेवा भाव निर्णायक: राज्यपाल मंगुभाई पटेल

भोपाल स्थित कुशाभाऊ ठाकरे अंतर्राष्ट्रीय कन्वेंशन सेंटर में शुक्रवार को आयोजित बरकतउल्लाह विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में राज्यपाल श्री मंगुभाई पटेल ने कहा कि वर्ष 2047 तक विकसित राष्ट्र के लक्ष्य को हासिल करने के लिए देश की युवा शक्ति, नवाचार और जनसेवा का संकल्प अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने उपाधि प्राप्त करने वाले छात्र-छात्राओं से अपनी शिक्षा और प्रतिभा का उपयोग व्यक्तिगत प्रगति के साथ-साथ समाज, पर्यावरण और देश के विकास में करने का आह्वान किया।

राज्यपाल ने विद्यार्थियों से कहा कि दीक्षांत समारोह वर्षों की निरंतर साधना और अनुशासन का प्रतिफल है, जो जीवन में नए दायित्वों और संभावनाओं के मार्ग प्रशस्त करता है। उन्होंने स्वतंत्रता संग्राम सेनानी और शिक्षाविद् बरकतउल्लाह जी के देशप्रेम को नमन करते हुए छात्रों से विनम्रता बनाए रखने की सीख दी। उन्होंने रेखांकित किया कि प्रत्येक विद्यार्थी की सफलता में माता-पिता के त्याग और प्राध्यापकों के मार्गदर्शन का अमूल्य योगदान होता है, जिसके प्रति उन्हें सदैव कृतज्ञ रहना चाहिए और अपने आचरण से संस्थान व परिवार का मान बढ़ाना चाहिए।

भारतीय ज्ञान परंपरा की प्रासंगिकता पर प्रकाश डालते हुए श्री पटेल ने कहा कि हमारी प्राचीन शिक्षा व्यवस्था केवल सूचना प्राप्त करने का माध्यम नहीं, बल्कि आत्म-बोध, चरित्र निर्माण और जनकल्याण की साधना रही है। उन्होंने महर्षि सांदीपनि के आश्रम में भगवान श्रीकृष्ण, बलराम और सुदामा के एक साथ अध्ययन करने का प्रसंग साझा करते हुए कहा कि गुरु-शिष्य परंपरा में समानता और अनुशासन सर्वोपरि था। उन्होंने आह्वान किया कि इसी समृद्ध विरासत को आधार बनाकर वर्तमान युग की चुनौतियों और भावी अनुसंधानों का मार्ग तलाशा जाना चाहिए।

दीक्षांत समारोह के मुख्य विषय ‘हरित ऊर्जा से विकसित भारत बनाने की पहल’ की सराहना करते हुए राज्यपाल ने पर्यावरण और विकास के मध्य संतुलन को अपरिहार्य बताया। उन्होंने अनियंत्रित प्राकृतिक दोहन से उत्पन्न हो रहे जलवायु परिवर्तन और ग्लोबल वार्मिंग पर चिंता व्यक्त की तथा प्रधानमंत्री के ‘एक पेड़ माँ के नाम’ अभियान से जुड़ने का आग्रह किया। कच्छ के रण में एक शिक्षक दंपती द्वारा जनसहयोग से पौधरोपण कर स्कूल परिसर की बाउंड्री वॉल बनाने के उदाहरण के जरिए उन्होंने समझाया कि मजबूत संकल्प से छोटे प्रयास भी दूरगामी परिणाम देते हैं। साथ ही, 17 सितंबर से 17 अक्टूबर तक जारी ‘जन सेवा संकल्प’ अभियान के तहत उन्होंने परिसरों में सेवा शिविर लगाने और थैलेसीमिया, कैंसर व सिकल सेल के मरीजों के लिए रक्तदान को प्रोत्साहित करने की बात कही।

समारोह में उच्च, तकनीकी शिक्षा एवं आयुष मंत्री श्री इन्दर सिंह परमार ने विश्वविद्यालय की नियमित आयोजन परंपरा की सराहना करते हुए बताया कि प्रदेश में इस वर्ष लड़कों की तुलना में बेटियों का उच्च शिक्षा में नामांकन अधिक रहा है। उन्होंने इसे बदलते और सशक्त होते भारत का प्रतीक बताया। श्री परमार ने कहा कि मध्य प्रदेश राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 को धरातल पर प्रभावी ढंग से क्रियान्वित करने वाले अग्रणी राज्यों में शुमार है।

कार्यक्रम में बरकतउल्लाह विश्वविद्यालय के पूर्व छात्र एवं भारतीय विदेश व्यापार संस्थान के कुलपति प्रो. के. रंगराजन ने कहा कि आज वैश्विक पटल पर पहचान बनाने के लिए विदेश जाने की आवश्यकता नहीं है, क्योंकि भारत में असीम अवसर उपलब्ध हैं और देश प्रमुख विकसित राष्ट्रों के साथ मुक्त व्यापार समझौतों की दिशा में तेजी से कदम बढ़ा रहा है। वहीं, अपर मुख्य सचिव व विश्वविद्यालय के कुलगुरु श्री अनुपम राजन ने विद्यार्थियों को दीक्षांत शपथ दिलाई और जानकारी दी कि समारोह में 85 शोधार्थियों को पीएच.डी. उपाधि तथा 27 मेधावियों को स्वर्ण पदक प्रदान किए गए हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *