वैश्विक चुनौतियों के बीच ग्लोबल साउथ की आवाज महत्वपूर्ण: एस. जयशंकर

वैश्विक चुनौतियों के बीच ग्लोबल साउथ की आवाज महत्वपूर्ण: एस. जयशंकर

संयुक्त राष्ट्र महासभा (यूएनजीए) के 81वें सत्र के दौरान भारतीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कहा कि वर्तमान भू-राजनीतिक विखंडन, अंतरराष्ट्रीय संघर्षों, जलवायु संकट, आर्थिक अस्थिरता और तकनीकी बदलावों के दौर में भी विकासशील देशों (ग्लोबल साउथ) की आवाज दुनिया के लिए अत्यंत अहम बनी रहेगी।

विदेश मंत्री ने ‘रप्चर्स एंड रैम्पार्ट्स: बिल्डिंग ब्रिजेज फॉर अ चेंजिंग वर्ल्ड’ विषय पर आयोजित एक उच्चस्तरीय परिचर्चा में शिरकत की। इस संवाद में जमैका, घाना और सूरीनाम के विदेश मंत्रियों के अलावा ईस्ट-वेस्ट सेंटर की अध्यक्ष सेलेस्टे कॉनर्स भी मौजूद रहीं। इस बैठक के बाद सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर जानकारी देते हुए विदेश मंत्री ने बताया कि सभी प्रतिभागियों ने माना कि संयुक्त राष्ट्र आज भी एक अपरिहार्य मंच है, किंतु वर्तमान वैश्विक वास्तविकताओं और ग्लोबल साउथ की अपेक्षाओं को समाहित करने के लिए इसमें व्यापक सुधार आवश्यक हैं।

बदलती वैश्विक व्यवस्था का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि दुनिया अब किन्हीं दो ध्रुवों या सीमित विकल्पों के दायरे में सिमट कर नहीं रहने वाली है। वर्तमान में विभिन्न राष्ट्र अपने हितों, प्राथमिकताओं, नैतिक मूल्यों और परस्पर विश्वास के आधार पर स्वतंत्र निर्णय ले रहे हैं।

इसी दौरान विदेश मंत्री जयशंकर ने दक्षिण अफ्रीका के विदेश मंत्री रोनाल्ड लामोला और ब्राजील के विदेश मंत्री माउरो विएरा के साथ आईBSA (IBSA) मंत्रिस्तरीय बैठक में भी भाग लिया। बैठक के उपरांत जारी साझा बयान में तीनों देशों ने पहलगाम में हुए आतंकी हमले की कड़े शब्दों में निंदा की और आतंकवाद के विरुद्ध ‘जीरो टॉलरेंस’ के संकल्प को दोहराया।

त्रिपक्षीय बयान में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) के ढांचे में आमूलचूल परिवर्तन की मांग की गई, ताकि इसे अधिक लोकतांत्रिक, वैध, प्रतिनिधिक और समकालीन परिस्थितियों के अनुरूप बनाया जा सके। इसके साथ ही, भू-राजनीतिक टकरावों के कारण ग्लोबल साउथ पर पड़ रहे विपरीत प्रभावों, विशेष रूप से खाद्य व ऊर्जा असुरक्षा, महंगाई और वित्तीय दबावों को लेकर गहरी चिंता व्यक्त की गई।

आईBSA देशों ने एक निष्पक्ष, संतुलित और परस्पर लाभकारी वैश्विक व्यापार प्रणाली की पैरवी की। साथ ही महिलाओं और बालिकाओं के सशक्तिकरण तथा सामाजिक-आर्थिक विषमताओं को दूर करने की प्रतिबद्धता जताई। पर्यावरण संरक्षण के संदर्भ में तीनों देशों ने ग्लोबल साउथ में नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता को तीन गुना करने, ऊर्जा दक्षता में सुधार लाने और बायोगैस, जैव ईंधन व कम उत्सर्जन वाले हाइड्रोजन जैसे विकल्पों के विस्तार का समर्थन किया। बैठक में आर्थिक संवृद्धि को गति देने के लिए डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर, सार्वभौमिक कनेक्टिविटी और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के प्रभावी उपयोग पर भी बल दिया गया।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *