यूपी में नशा तस्करों पर चौतरफा कार्रवाई: 10 जिलों में विशेष निगरानी, स्कूल-कॉलेजों के पास ड्रग्स पर पूर्ण प्रतिबंध

यूपी में नशा तस्करों पर चौतरफा कार्रवाई: 10 जिलों में विशेष निगरानी, स्कूल-कॉलेजों के पास ड्रग्स पर पूर्ण प्रतिबंध

लखनऊ: उत्तर प्रदेश में मादक पदार्थों के काले कारोबार को जड़ से समाप्त करने के लिए राज्य सरकार ने बहुआयामी रणनीति लागू की है। मुख्य सचिव एसपी गोयल ने शुक्रवार को नारकोटिक्स कंट्रोल एवं समन्वय तंत्र (एनकॉर्ड) की तृतीय राज्य स्तरीय बैठक की अध्यक्षता करते हुए आदेश दिया कि प्रदेश भर के सभी शिक्षण संस्थानों के आसपास 500 मीटर के क्षेत्र को पूर्णतः ‘ड्रग फ्री जोन’ बनाकर इसका कड़ाई से अनुपालन कराया जाए। बैठक में नशा मुक्ति अभियानों, अवैध नेटवर्क के ध्वस्तीकरण, जब्त सामग्री के निपटारे और विभागों के साझा प्रयासों की स्थिति परखी गई।

मुख्य सचिव ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि जनपदों और कमिश्नरेट स्तर पर मादक पदार्थों की आपूर्ति करने वाले गिरोहों, उनके वित्तीय स्रोतों और वितरण प्रणाली की कड़ियां तोड़ी जाएं। जिलाधिकारियों की अध्यक्षता में गठित समितियों की नियमित बैठकें सुनिश्चित करने के साथ ही चिन्हित संवेदनशील इलाकों में कड़ी चौकसी रखने के निर्देश दिए गए। मुख्य सचिव ने कहा कि एनडीपीएस कानून के तहत सख्त निरोधात्मक कार्रवाई की जाए और तस्करों द्वारा अपराध के जरिए खड़ी की गई अवैध संपत्तियों को प्राथमिकता पर कुर्क किया जाए। इसके अलावा, दवाओं के गलत इस्तेमाल, प्री-कर्सर केमिकल्स और एसीटिक एनहाइड्राइड के अवैध डायवर्जन पर भी सतत निगरानी रखने को कहा गया।

बैठक में प्रस्तुत रिपोर्ट के अनुसार, बीते एक दशक के जब्ती रिकॉर्ड्स का अध्ययन करने के बाद राज्य के 10 जिलों को प्रमुख हॉट स्पॉट के रूप में चिन्हित किया गया है। आईजी एएनटीएफ अब्दुल हमीद ने जानकारी दी कि लखनऊ, कानपुर, गाजियाबाद, गौतमबुद्धनगर, आगरा, बरेली, सहारनपुर, शामली, बाराबंकी और सोनभद्र में प्रत्येक जगह 20-20 बड़े तस्करों (हाई वैल्यू टारगेट) को चिन्हित कर उनके खिलाफ अभियान चलाया जा रहा है। वर्ष 2026 में अब तक जिला स्तर पर 563 समन्वय गोष्ठियां आयोजित हो चुकी हैं।

प्रवर्तन एजेंसियों द्वारा वर्ष 2026 में की गई कार्रवाई का ब्योरा देते हुए बताया गया कि राज्य में अब तक एनडीपीएस एक्ट के तहत 3,737 एफआईआर दर्ज कर 5,390 लोगों को सलाखों के पीछे भेजा गया है। इस दौरान 32,768 किलोग्राम अवैध मादक पदार्थ जब्त किए गए। इसमें एएनटीएफ की विशेष भूमिका रही, जिसने 153 मुकदमों में 340 अभियुक्तों को दबोचकर 8,135.52 किलोग्राम नशीली सामग्री पकड़ी। एएनटीएफ के गठन (2022) से लेकर अगस्त 2026 तक लगभग 1,925 करोड़ रुपये के 4,37,902 किलोग्राम नशीले पदार्थों का मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) के तहत निस्तारण कराया जा चुका है, जबकि तस्करों की करीब 78 करोड़ रुपये की संपत्ति अब तक जब्त की गई है।

सख्ती के साथ-साथ समाज को जागरूक करने के लिए वर्ष 2026 की पहली छमाही (जनवरी से जून) में 2,642 विशेष कार्यक्रम आयोजित कर 1,50,711 लोगों को नशा त्यागने की शपथ दिलाई गई। प्रशासनिक समीक्षा के आधार पर राज्य में भांग की दुकानों की संख्या भी वर्ष 2023-24 में 1,588 से घटाकर वर्ष 2026-27 में 1,288 की गई है। बैठक में अंतर-विभागीय डैशबोर्ड का प्रारूप भी पेश हुआ। इसके अलावा, अवैध अफीम उत्पादन की रोकथाम के लिए सीबीएन और सीआईईबी के हेल्पलाइन नंबर 986855002 के उपयोग पर चर्चा हुई, जिसके तहत 2026-27 के लाइसेंस सितंबर से दिए जा रहे हैं और नवंबर में बुवाई के बाद जनवरी-फरवरी में जीपीएस आधारित पैमाइश कराई जाएगी।

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