संयुक्त राष्ट्र महासभा (यूएनजीए) के 81वें सत्र के दौरान न्यूयॉर्क में आयोजित ‘ग्रुप ऑफ 77’ (जी-77) के विदेश मंत्रियों की 50वीं वार्षिक बैठक में भारत ने विकासशील देशों के अधिकारों की पुरजोर वकालत की है। बैठक में भारत का पक्ष रखते हुए विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने आह्वान किया कि ग्लोबल साउथ को केवल अंतरराष्ट्रीय व्यवस्थाओं और नियमों का अनुसरण करने की स्थिति से बाहर निकलकर अब स्वयं नीतियां और नियम तय करने की भूमिका में आना होगा।
विदेश मंत्रालय के आधिकारिक ‘एक्स’ हैंडल से दी गई जानकारी के अनुसार, इस उच्चस्तरीय बैठक का मुख्य विषय ‘ग्लोबल साउथ और मल्टीलेटरलिज्म का भविष्य’ रखा गया था, जहां विदेश सचिव ने भारत का आधिकारिक राष्ट्रीय वक्तव्य प्रस्तुत किया। संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी मिशन ने भी सत्र का ब्योरा साझा करते हुए स्पष्ट किया कि बदलते अंतरराष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य में आम जनता और सतत विकास पर केंद्रित बहुपक्षीय व्यवस्था को आगे बढ़ाने के लिए जी-77 मंच की प्रासंगिकता पहले से कहीं अधिक बढ़ चुकी है।
विदेश सचिव ने रेखांकित किया कि जी-77 एक ऐसा सशक्त माध्यम है जो विकासशील देशों की चिंताओं और अपेक्षाओं को वैश्विक पटल पर एकजुटता प्रदान करता है। इस दौरान उन्होंने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) के ढांचे में फौरी सुधार की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि जब तक सुरक्षा परिषद में विकासशील राष्ट्रों को पर्याप्त प्रतिनिधित्व और मजबूत आवाज नहीं मिलती, तब तक वास्तविक बहुपक्षवाद की स्थापना संभव नहीं है।
अपने संबोधन में मिस्री ने विकासशील जगत से सामूहिक प्रयास करने की अपील करते हुए कहा कि वैश्विक निर्णयों में भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए सभी देशों को एकजुट होना होगा।
न्यूयॉर्क प्रवास के दौरान विदेश सचिव ने संयुक्त राष्ट्र की उप-महासचिव (डिप्टी सेक्रेटरी-जनरल) अमीना जे. मोहम्मद से भी शिष्टाचार भेंट की। इस बैठक में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) और सतत विकास से जुड़े नए अवसरों पर विस्तृत विमर्श हुआ।
मिस्री ने डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (डीपीआई) के विस्तार में भारत की भूमिका का उल्लेख करते हुए बताया कि देश समावेशी, सुलभ और मानव-कल्याण पर आधारित एआई समाधानों के विकास पर कार्य कर रहा है। साथ ही, उन्होंने जमीनी स्तर पर विकास परियोजनाओं के त्वरित क्रियान्वयन के लिए संयुक्त राष्ट्र के तंत्रों, विशेषकर उसकी कंट्री टीमों, को अधिक प्रभावी और साधन-संपन्न बनाने का सुझाव दिया।