यूएनजीए मंच पर भारत की बहुपक्षीय कूटनीति: अफगानिस्तान संकट, खाद्य सुरक्षा और मेक्सिको के साथ तकनीकी सहयोग पर हुई उच्चस्तरीय चर्चा

यूएनजीए मंच पर भारत की बहुपक्षीय कूटनीति: अफगानिस्तान संकट, खाद्य सुरक्षा और मेक्सिको के साथ तकनीकी सहयोग पर हुई उच्चस्तरीय चर्चा

संयुक्त राष्ट्र महासभा (यूएनजीए) के उच्चस्तरीय सत्र के बीच भारतीय राजनयिकों ने न्यूयॉर्क में मेक्सिको के विदेश नेतृत्व, वर्ल्ड फूड प्रोग्राम (डब्लूएफपी) तथा अफगानिस्तान में कार्यरत यूएन मिशन (यूनामा) के साथ अलग-अलग बैठकें आयोजित कीं। इन वार्ताओं के जरिए भारत ने स्वास्थ्य व प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में द्विपक्षीय संबंधों को मजबूती देने, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मानवीय सहायता के संकट और अफगानिस्तान की मौजूदा परिस्थितियों से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाया।

महासभा के 81वें सत्र के इतर विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने मेक्सिको के विदेश मंत्री रॉबर्टो वेलास्को अल्वारेज के साथ औपचारिक मुलाकात की, जिसकी पुष्टि उन्होंने सोशल मीडिया पोस्ट के माध्यम से की। मेक्सिको की ओर से जारी बयान में बताया गया कि दोनों देशों ने अपने पुराने सहयोगी क्षेत्रों—विशेष रूप से तकनीक और स्वास्थ्य सेवा—में साझेदारी को और प्रगाढ़ करने की रणनीतियों पर मंथन किया। दोनों देश पहले से ही व्यापारिक आदान-प्रदान, औषधि निर्माण, ऑटोमोबाइल उद्योग, वैज्ञानिक अनुसंधान और वैश्विक मंचों पर एक-दूसरे के साथ मिलकर काम कर रहे हैं।

इधर, मानवीय सहायता के मोर्चे पर विदेश मंत्रालय के सचिव (पश्चिम) सिबी जॉर्ज ने विश्व खाद्य कार्यक्रम के कार्यवाहक कार्यकारी निदेशक कार्ल स्काउ के साथ बैठक की। विदेश मंत्रालय के अनुसार, इस संवाद में वैश्विक अस्थिरता और राहत कार्यों में आ रही जटिलताओं पर केंद्रित चर्चा हुई। कई क्षेत्रों में एक साथ उत्पन्न आपातकालीन परिस्थितियों से राहत प्रदाता संस्थाओं पर पड़ रहे असाधारण भार पर चिंता जताई गई। यह संवाद भारत और खाद्य कार्यक्रम के बीच स्थापित ऐतिहासिक संबंधों की निरंतरता को भी रेखांकित करता है।

विदित हो कि डब्लूएफपी और भारत का सहयोग अब महज पारंपरिक खाद्य आपूर्ति तक सीमित नहीं रहा है। अब इसका दायरा संस्थागत और तकनीकी सहायता तक विस्तृत हो गया है, जिसके अंतर्गत खाद्यान्न वितरण श्रृंखला को आधुनिक बनाना, पोषण स्तर में सुधार लाना तथा भारत की प्रभावी वितरण प्रणाली के अनुभवों को वैश्विक स्तर पर साझा करना शामिल है।

अफगानिस्तान की स्थिति पर केंद्रित बैठक में विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने यूएन महासचिव की विशेष प्रतिनिधि तथा यूनामा की प्रमुख रबाब फातिमा से संवाद किया। विदेश मंत्रालय ने इस बात की पुष्टि की कि अफगानिस्तान के आम नागरिकों की मानवीय आवश्यकताओं को पूरा करना किसी भी परिस्थिति में बाधित नहीं होना चाहिए। भारत ने यूनामा के योगदान की सराहना करते हुए सहयोग जारी रखने की प्रतिबद्धता दोहराई। आधिकारिक स्तर पर यह स्पष्ट रहा कि बातचीत केवल मानवीय सहायता और संयुक्त राष्ट्र के कार्यों तक सीमित थी, और इसमें तालिबान शासन को औपचारिक मान्यता देने या भारतीय विदेश नीति के रुख में किसी बदलाव का कोई संकेत नहीं दिया गया।

इन कूटनीतिक मुलाकातों से स्पष्ट संकेत मिलता है कि भारत ने संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान रणनीतिक प्राथमिकताओं को साधते हुए मेक्सिको के साथ तकनीकी व व्यापारिक रिश्ते प्रगाढ़ किए, डब्लूएफपी के साथ वैश्विक खाद्य चुनौतियों पर विमर्श किया और यूनामा के जरिए अफगानिस्तान के जनसाधारण की मानवीय चिंताओं को विश्व पटल पर रेखांकित किया।

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