अमेरिका ने होर्मुज जलडमरूमध्य को पुनः खोलने और परमाणु वार्ता फिर से शुरू करने संबंधी ईरान की सात दिनों की चरणबद्ध योजना को स्वीकार करने से इनकार कर दिया है। शनिवार को राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस प्रस्ताव को यह कहते हुए अस्वीकार किया कि तेहरान वास्तविक संवाद की शुरुआत से पहले ही प्रतिबंधों से मुक्ति और अपनी जब्त संपत्तियों की बहाली जैसी एकतरफा मांगें कर रहा है।
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने रविवार को एनबीसी के ‘मीट द प्रेस’ प्रसारण में तेहरान की स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि यदि अमेरिका टकराव समाप्त करे, आर्थिक नाकेबंदी हटाए और ईरान को अपनी संपत्तियों के उपयोग तथा कच्चे तेल की बिक्री की छूट दे, तो वे इस वैश्विक जलमार्ग को खोल देंगे। अराघची के मुताबिक, इन प्राथमिक कदमों को चार से पांच दिनों में आसानी से पूरा किया जा सकता है। उन्होंने जोर देकर कहा कि इस समझौते के तहत छठे दिन जलमार्ग आवागमन के लिए खोल दिया जाएगा और सातवें दिन दोनों पक्षों के बीच व्यापक समझौते के लिए औपचारिक संवाद शुरू हो सकेगा।
इस प्रस्ताव पर सख्त रुख अपनाते हुए अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि ईरानी नेतृत्व भारी नुकसान झेल रहा है और इसी वजह से तुरंत रास्ता निकालना चाहता है, जबकि अमेरिका इस क्षेत्र में निर्णायक बढ़त बनाए हुए है और पूरे होर्मुज मार्ग पर उसकी मजबूत पकड़ है। संयुक्त राष्ट्र में अमेरिकी राजदूत माइक वॉल्ट्ज ने सीएनएन के ‘स्टेट ऑफ द यूनियन’ में कहा कि ईरान सिर्फ बातचीत का वादा करके संयुक्त राष्ट्र और अमेरिका के कड़े प्रतिबंधों में ढील तथा अरबों डॉलर की जब्त राशि तुरंत हासिल करना चाहता था।
वॉल्ट्ज ने यह आशंका भी जताई कि ईरान सद्भावना के साथ वार्ता की मेज पर नहीं आ रहा है, जिससे उसके परमाणु कार्यक्रम को खत्म करने के लक्ष्य पर संशय बना हुआ है। उन्होंने ईरान पर जहाजों को निशाना बनाकर पूर्व समझौतों के उल्लंघन का आरोप भी मढ़ा, जिसे तेहरान ने पूरी तरह नकारते हुए अमेरिकी पक्ष को ही पूर्व समझौतों के टूटने का जिम्मेदार ठहराया।
ईरानी विदेश मंत्री ने कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप के सार्वजनिक बयानों के बाद भी वे मध्यस्थ देशों के जरिए औपचारिक प्रतिक्रिया का इंतजार कर रहे हैं। उन्होंने रेखांकित किया कि ईरान ने एक तार्किक विकल्प पेश किया है, जिसे खारिज करने की जिम्मेदारी वॉशिंगटन पर होगी। दूसरी तरफ, ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने सीबीएस के ‘फेस द नेशन’ कार्यक्रम में पूर्व एमओयू के अनुरूप सिलसिलेवार तरीके से आगे बढ़ने की प्रतिबद्धता जताई। उन्होंने ईरानी ठिकानों पर अमेरिका और इजरायल के हमलों का उल्लेख करते हुए स्पष्ट किया कि एनपीटी और तयशुदा वैश्विक नियमों के तहत परमाणु सीमाओं और स्वतंत्र निरीक्षण पर सहमति संभव है। विदेश मंत्री अराघची ने स्पष्ट निष्कर्ष दिया कि ईरान संभावित युद्ध के लिए पूरी तरह तैयार है, फिर भी उसने शांति वार्ता का मार्ग अवरुद्ध नहीं किया है और अब अंतिम निर्णय अमेरिकी नेतृत्व को लेना है।