कुशीनगर जिले की तमकुहीराज तहसील अंतर्गत नारायणी नदी का एपी तटबंध सोमवार आधी रात को अचानक टूट गया, जिसके चलते निचले ग्रामीण इलाकों में तेजी से नदी का पानी फैल गया। ततवा टोला के चैन पट्टी व जवहीं माली एहतमाली क्षेत्र में हुई इस घटना के बाद जिला प्रशासन और पुलिस महकमे ने तुरंत हरकत में आते हुए राहत कार्य शुरू कराया। पूर्व में ही सुरक्षित स्थानों पर जाने की प्रशासनिक चेतावनी के चलते किसी भी तरह का जान-माल का नुकसान नहीं हुआ और सभी ग्रामीण सुरक्षित हैं।
नदी के व्यवहार को लेकर प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि रात लगभग 12 बजे नारायणी नदी का प्रवाह घटकर 2 लाख 54 हजार क्यूसेक दर्ज किया गया था। जलस्तर में आई इस कमी के बाद बहाव में कटाव काफी तेज हो गया। तटबंध में चूहों द्वारा बनाए गए छेदों (रेट होल) और लंबे समय से जारी रिसाव के कारण बंधा कट गया, जिससे आसपास के करीब 24 गांवों पर जलभराव का खतरा गहरा गया है।
प्रशासन की प्राथमिकता वर्तमान में फंसे हुए नागरिकों को निकालना और सहायता पहुंचाना है। इस कार्य को सुनियोजित रूप से अंजाम देने के लिए राज्य आपदा मोचन बल (एसडीआरएफ) और राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ) की टुकड़ियों को तैनात किया गया है। अधिकारियों को पूरे क्षेत्र में व्यापक बचाव अभियान चलाने के स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं।
राज्य शासन स्तर पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने स्वयं मोर्चा संभालते हुए घटना की समीक्षा की। उन्होंने कुशीनगर के जिलाधिकारी, गोरखपुर के कमिश्नर और एडीजी से फोन पर वार्ता कर वस्तुस्थिति की जानकारी ली। मुख्यमंत्री ने सख्त निर्देश दिए कि विस्थापित व प्रभावित परिवारों तक तत्परता से राहत सामग्री पहुंचाई जाए और बचाव प्रबंधन में कोई कसर न छोड़ी जाए।
मौके की स्थिति पर स्थानीय निवासी रितेश सिंह ने जानकारी दी कि तटबंध का लगभग 70 से 100 मीटर हिस्सा बह जाने से अनेक गांव सीधे प्रभावित हुए हैं। ग्रामीणों का जीवन सुरक्षित है, मगर उनके सामान को क्षति पहुंची है। स्थानीय लोगों के अनुसार, 20 से 25 गांवों के जनजीवन पर असर पड़ा है, जिसकी समीक्षा करने प्रशासनिक दल के साथ क्षेत्रीय विधायक ने भी मौके का निरीक्षण किया।