अमेरिकी सरकार की निगरानी संस्था ‘गवर्नमेंट अकाउंटेबिलिटी ऑफिस’ (जीएओ) द्वारा सोमवार को जारी एक विस्तृत ऑडिट रिपोर्ट के अनुसार, वित्त वर्ष 2025 में भारतीय आवेदकों को अमेरिकी विजिटर वीजा के इंटरव्यू स्लॉट के लिए औसतन 346 दिनों की लंबी प्रतीक्षा करनी पड़ी।
रिपोर्ट में स्थिति स्पष्ट करते हुए रेखांकित किया गया है कि 346 दिनों का यह आंकड़ा साक्षात्कार की तारीख मिलने का पिछला औसत मात्र है। इसका तात्पर्य यह कतई नहीं है कि इंटरव्यू समाप्त होने के बाद वीजा निर्णय में इतना समय लगता है, और न ही यह आज आवेदन करने वाले प्रत्येक व्यक्ति के लिए तयशुदा प्रतीक्षा अवधि को दर्शाता है। यह विलंब मुख्य रूप से वीजा की भारी मांग और दूतावास में तैनात कर्मचारियों की सीमित संख्या के बीच बढ़ते असंतुलन की वजह से पैदा हुआ।
दस्तावेजों के मुताबिक, वर्ष 2025 के दौरान भारत से तकरीबन 14,55,255 लोगों ने गैर-आव्रजक (नॉन-इमिग्रेंट) वीजा के लिए आवेदन प्रस्तुत किए थे। इसके विपरीत, पूरे देश में अमेरिकी विदेश विभाग के मात्र 68 कांसुलर अधिकारी कार्यरत थे। इस प्रकार प्रत्येक अधिकारी के जिम्मे औसतन 21,401 आवेदनों का भारी-भरकम कार्यभार दर्ज हुआ। हालांकि कार्यभार के ये आंकड़े विभिन्न अस्थाई वीजा श्रेणियों से जुड़े हैं, जबकि 346 दिनों का लंबा इंतजार विशेष रूप से विजिटर वीजा इंटरव्यू के संबंध में दर्ज किया गया है।
वैश्विक स्तर पर तुलना करें तो भारत की स्थिति अन्य बड़े देशों की अपेक्षा काफी गंभीर रही। इसी समयावधि में चीन में विजिटर वीजा इंटरव्यू के लिए औसत प्रतीक्षा अवधि सिर्फ 34 दिन और ब्राजील में मात्र 32 दिन रही। मेक्सिको में प्रति अधिकारी फाइलों का दबाव भारत के समान होने के बावजूद वहां का औसत इंतजार 283 दिन रहा। दुनिया में सबसे अधिक प्रतीक्षा समय वाले शीर्ष 10 देशों की सूची में भारत सातवें स्थान पर रहा।
ऑडिट दल ने वास्तविक स्थिति का आकलन करने के लिए नई दिल्ली, बीजिंग, मेक्सिको सिटी और साओ पाउलो का प्रत्यक्ष दौरा किया। चारों देशों के अधिकारियों ने माना कि कोरोना महामारी के बाद वीजा मांग में हुआ अप्रत्याशित उछाल और अधिकारियों की अपर्याप्त संख्या ही बैकलॉग न समाप्त हो पाने की प्रमुख वजह है। नई दिल्ली स्थित दूतावास में सीमित स्थान और इंटरव्यू काउंटरों (खिड़कियों) की कमी भी बाधा बनी रही, जिसके चलते सैकड़ों आवेदक परिसर के बाहर व अन्य प्रतीक्षा कक्षों में कतारबद्ध दिखे। रिपोर्ट में यह भी इंगित किया गया कि परिसर में नई इमारत में स्थानांतरित होने की योजना के बावजूद साक्षात्कार काउंटरों की संख्या में कोई बदलाव नहीं होगा।
रिपोर्ट में आवेदनों की गहन जांच में लगने वाले समय और अनाधिकृत वीजा एजेंटों की सक्रियता का भी उल्लेख है। जांच में सामने आया कि कुछ व्यावसायिक एजेंट स्लॉट खुलते ही उन्हें आरक्षित कर लेते थे और फिर जरूरतमंदों को बेचते थे; इस पर अंकुश लगाने के लिए विदेश विभाग ने अपनी शेड्यूलिंग प्रणाली में तकनीकी बदलाव किए हैं। इसके अलावा पेंडेंसी कम करने के उद्देश्य से वित्त वर्ष 2024 में वाशिंगटन स्थित एक यूनिट ने नई दिल्ली के 80.6 प्रतिशत ऐसे विजिटर वीजा प्रकरणों को रिमोट आधार पर निस्तारित किया जिनमें इंटरव्यू की जरूरत नहीं थी, जबकि स्थानीय स्टाफ ने भी निपटान में गति लाने के लिए अतिरिक्त शनिवार को ड्यूटी की।