केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने अमेरिका के मिल्वौकी में आयोजित जी20 व्यापार मंत्रियों की बैठक के उद्घाटन सत्र में भाग लिया। ‘भोजन एवं व्यापार’ विषयक सत्र के दौरान उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत की नीतियां खाद्य सुरक्षा, किसानों के हितों के संरक्षण और नियमों पर आधारित बहुपक्षीय व्यापार व्यवस्था के प्रति पूरी तरह समर्पित हैं। सम्मेलन के दौरान व्यापारिक प्रतिबंधों के जरिए भोजन को कूटनीतिक दबाव का माध्यम बनाने के खिलाफ जी20 के संयुक्त वक्तव्य पर सभी सदस्य देशों ने सहमति व्यक्त की।
चर्चा के केंद्र में खाद्य सुरक्षा को रखने के लिए अमेरिकी अध्यक्षता की सराहना करते हुए केंद्रीय मंत्री ने कहा कि नागरिकों के लिए पर्याप्त पोषण की व्यवस्था करना और कृषकों के लिए अवसरों का विस्तार करना भारत की प्राथमिकताओं में शामिल है। उन्होंने जोर देकर कहा कि अंतरराष्ट्रीय संबंधों में खाद्य सामग्री का उपयोग किसी भी मुल्क पर अनुचित दबाव डालने के लिए कतई नहीं किया जाना चाहिए।
श्री गोयल ने रेखांकित किया कि वैश्विक संघर्षों के कारण उत्पन्न हुए खाद्य, ऊर्जा और उर्वरक संकट का सर्वाधिक नुकसान विकासशील व अल्पविकसित यानी ग्लोबल साउथ के देशों को उठाना पड़ा है। उन्होंने आगाह किया कि रासायनिक खादों की मौजूदा किल्लत आने वाले समय में गंभीर खाद्य संकट का कारण बन सकती है। इसके समाधान के लिए उन्होंने एक स्थिर वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला और व्यापक अंतरराष्ट्रीय समन्वय की आवश्यकता बताई।
भारत के घरेलू प्रयासों का उल्लेख करते हुए उन्होंने बताया कि कोविड-19 महामारी जैसी भीषण आपदा के बीच भी देश ने अपने 1.4 अरब से अधिक नागरिकों के लिए भोजन का प्रबंध किया और कई जरूरतमंद राष्ट्रों को भी खाद्यान्न भेजा। उन्होंने जानकारी दी कि मौजूदा समय में भी देश के 80 करोड़ से ज्यादा लोगों को मुफ्त अनाज की सुविधा दी जा रही है।
केंद्रीय मंत्री ने सार्वजनिक खाद्य भंडारण प्रणाली का बचाव करते हुए कहा कि भारत छोटे और सीमांत किसानों से अनाज खरीदकर खाद्य स्थिरता सुनिश्चित करता है। उत्पादन प्रभावित होने की स्थिति में बाजार में उपलब्धता और उचित दरें बनाए रखने के लिए पारदर्शी और अस्थायी कदम उठाए जाते हैं, जिन्हें विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) के बाली और जिनेवा मंत्रिस्तरीय घोषणाओं के तहत संरक्षण प्राप्त है। उन्होंने स्पष्ट किया कि खाद्य सुरक्षा उपायों और बलपूर्वक किए जाने वाले व्यापारिक कदमों के बीच अंतर समझा जाना चाहिए।
नियम-आधारित और निष्पक्ष बहुपक्षीय व्यापार के प्रति भारत की प्रतिबद्धता दोहराते हुए उन्होंने 2011 की कृषि बाजार सूचना प्रणाली और 12वें मंत्रिस्तरीय सम्मेलन के उस निर्णय का जिक्र किया, जिसमें विश्व खाद्य कार्यक्रम की खरीद को निर्यात पाबंदियों से अलग रखा गया है। इसके साथ ही, जी20 मंत्रियों ने ‘बलपूर्वक व्यापारिक कार्रवाइयों के जरिए भोजन को हथियार के तौर पर इस्तेमाल किए जाने’ से जुड़े साझा बयान को मंजूरी दी। बैठक के अतिरिक्त पीयूष गोयल ने विस्कॉन्सिन के मेक्वॉन में रॉकवेल ऑटोमेशन संयंत्र का दौरा किया, मिल्वौकी आर्ट म्यूजियम में आयोजित स्वागत भोज में शिरकत की तथा ब्राजील, अमेरिका, यूरोपीय संघ, ब्रिटेन, मैक्सिको और पोलैंड के समकक्षों के साथ द्विपक्षीय बातचीत की।