अंतरराष्ट्रीय बाजारों से मिले मजबूत रुझानों और खरीदारों की सक्रियता के बीच सप्ताह के अंतिम कारोबारी सत्र में शुक्रवार को घरेलू व वैश्विक बाजारों में बहुमूल्य धातुओं की कीमतों में जोरदार तेजी दर्ज की गई। अमेरिकी डॉलर में आई गिरावट, ब्याज दरों के रुख और पश्चिम एशिया में जारी तनाव के कारण सुरक्षित निवेश के प्रति निवेशकों का आकर्षण बढ़ा, जिससे सोने में 1 प्रतिशत और चांदी में 1.40 प्रतिशत से अधिक की बढ़त देखने को मिली।
वैश्विक स्तर पर अमेरिकी कमोडिटी एक्सचेंज (कॉमेक्स) पर सोना पिछले दो महीनों के निचले स्तर से उबरने में सफल रहा। करीब 1 प्रतिशत से ज्यादा की मजबूती के साथ यह लगभग 4,200 डॉलर प्रति औंस के स्तर के आसपास पहुंच गया। वहीं, निवेशकों की चौतरफा लिवाली के चलते चांदी भी लगभग 2 प्रतिशत की छलांग लगाकर 60 डॉलर प्रति औंस के पार निकल गई।
विदेशी बाजारों में अमेरिकी डॉलर की विनिमय दर में नरमी और बॉन्ड प्रतिफल में गिरावट ने सर्राफा बाजार को मजबूत सहारा दिया है। इसके साथ ही बाजार प्रतिभागी अमेरिकी फेडरल रिजर्व के भावी मौद्रिक नीतिगत फैसलों पर भी पैनी नजर रखे हुए हैं, जिससे सुरक्षित निवेश माध्यमों की मांग को गति मिली है।
अंतरराष्ट्रीय बाजार की इस तेजी का सीधा प्रभाव भारतीय वायदा बाजार पर भी स्पष्ट दिखाई दिया। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (एमसीएक्स) पर शुक्रवार के शुरुआती सत्र में दिसंबर अनुबंध वाले सोने ने 1,51,200 रुपये प्रति 10 ग्राम का उच्च स्तर छुआ, जो अपने पिछले बंद भाव 1,49,610 रुपये की तुलना में 1,590 रुपये अथवा 1.06 प्रतिशत की बढ़त दर्शाता है। इसी क्रम में दिसंबर अनुबंध वाली चांदी भी 3,267 रुपये यानी 1.47 प्रतिशत चढ़कर 2,24,500 रुपये प्रति किलोग्राम के उच्च स्तर पर पहुंच गई, जबकि इसका पिछला बंद भाव 2,21,233 रुपये था।
कारोबार के दौरान सुबह लगभग 11 बजे तक एमसीएक्स पर दिसंबर डिलीवरी का सोना 1,493 रुपये यानी 1 प्रतिशत की बढ़त के साथ 1,51,103 रुपये प्रति 10 ग्राम पर बना रहा। इसी समय दिसंबर डिलीवरी की चांदी 3,088 रुपये यानी 1.40 प्रतिशत की तेजी लेकर 2,24,321 रुपये प्रति किलोग्राम पर कारोबार करती दिखी।
बाजार विश्लेषकों के अनुसार, पश्चिम एशिया का मौजूदा भू-राजनीतिक परिदृश्य निवेशकों के लिए चिंता का प्रमुख कारण बना हुआ है, जिससे सोने-चांदी को हेजिंग के रूप में समर्थन मिल रहा है। इसके अतिरिक्त, अमेरिकी केंद्रीय बैंक की ब्याज दरों को लेकर बनी अनिश्चितता भी मूल्य निर्धारण को प्रभावित कर रही है। भारत में आगामी दशहरा, धनतेरस और दिवाली के अलावा वैवाहिक आयोजनों के चलते आभूषणों की घरेलू खरीदारी बढ़ने की पूरी संभावना है, जो आगे भी कीमतों को आधार प्रदान कर सकती है।