विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने बुधवार को पश्चिम अफ्रीकी देश कोट डी आइवर की उच्चस्तरीय यात्रा के दौरान राष्ट्रपति अलासाने ओत्तारा से मुलाकात कर दोनों देशों के रिश्तों को पारस्परिक सम्मान और समान विकास लक्ष्यों से प्रेरित बताया। तीन देशों के अफ्रीकी दौरे के अंतर्गत घाना से कोट डी आइवर पहुंचे भारतीय विदेश मंत्री ने अपनी यात्रा पूरी करने के बाद इथियोपिया का रुख किया।
आबिदजान स्थित राष्ट्रपति भवन में आयोजित बैठक में जयशंकर ने राष्ट्रपति अलासाने ओत्तारा को भारतीय शीर्ष नेतृत्व—राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू तथा प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी—का शुभकामना संदेश सौंपा। उन्होंने कहा कि दोनों देशों की सहभागिता परस्पर भरोसे पर निर्मित है। जयशंकर ने द्विपक्षीय संबंधों को टिकाऊ और दोनों पक्षों के लिए हितकारी रूप देने के संबंध में राष्ट्रपति ओत्तारा के विचारों का स्वागत किया।
यात्रा के दौरान रक्षा सहयोग को सशक्त करने के उद्देश्य से विदेश मंत्री की बैठक कोट डी आइवर के उप-प्रधानमंत्री व रक्षा मंत्री तेने बिराहिमा ओत्तारा के साथ संपन्न हुई। इस वार्ता में आतंकवाद से मुकाबला करने, सुरक्षा कर्मियों के प्रशिक्षण और संस्थागत संपर्कों के माध्यम से रक्षा तंत्र को मजबूत बनाने पर जोर दिया गया। रक्षा मंत्री ओत्तारा ने बैठक को दोनों देशों की सुरक्षा एवं शांति की दिशा में एक अहम कदम करार दिया।
व्यापारिक व बुनियादी ढांचे से जुड़े मुद्दों पर विदेश मंत्री ने विदेश मामलों की राज्य मंत्री नियाले काबा के साथ गहन विमर्श किया। दोनों पक्षों ने कृषि, स्वास्थ्य सेवा, पूंजी निवेश तथा दोनों देशों के नागरिकों के बीच संपर्क के क्षेत्रों में सहयोग की रूपरेखा तय की। बातचीत में इस बात की पुष्टि की गई कि भारत की ओर से संचालित होने वाली विकास योजनाएं पूरी तरह से कोट डी आइवर की अपनी राष्ट्रीय प्राथमिकताओं के अनुरूप होंगी, साथ ही बहुपक्षीय मंचों पर आपसी तालमेल को बढ़ाया जाएगा।
विदेश मंत्री ने अपने दौरे में 1964 से संचालित आईटीईसी (भारतीय तकनीकी एवं आर्थिक सहयोग) कार्यक्रम के पूर्व प्रतिभागियों और वहां रह रहे भारतीय प्रवासियों से भी भेंट की। उन्होंने कहा कि अफ्रीका के साथ भारत के संबंधों की नींव साझेदार देशों की प्राथमिकताओं के सम्मान पर आधारित है। जयशंकर का यह कूटनीतिक दौरा अफ्रीकी महाद्वीप के साथ सहयोग बढ़ाने, ‘ग्लोबल साउथ’ की आवाज को मजबूत करने और व्यापार, रक्षा तथा जन-कल्याण के क्षेत्रों में भारत के विस्तार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।