वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय द्वारा गुरुवार को जारी आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, सितंबर 2026 में भारत के वस्तु निर्यात में 23.04 प्रतिशत का उल्लेखनीय उछाल दर्ज किया गया और यह बढ़कर 44.40 अरब अमेरिकी डॉलर पर पहुंच गया। पिछले वर्ष इसी माह में देश का वस्तु निर्यात 36.08 अरब डॉलर रहा था। निर्यात में आई इस मजबूती के कारण देश के वस्तु व्यापार घाटे में भी सुधार देखा गया है, जो एक साल पहले के 33 अरब डॉलर से घटकर 30.21 अरब डॉलर रह गया। हालांकि, इस दौरान कुल आयात में भी बढ़ोतरी हुई और यह 69.08 अरब डॉलर से बढ़कर 74.61 अरब डॉलर दर्ज किया गया।
समग्र व्यापार के मोर्चे पर भी सकारात्मक रुझान देखने को मिला है। वस्तु एवं सेवा क्षेत्र दोनों को मिलाकर देश का कुल निर्यात 10.99 प्रतिशत की वार्षिक वृद्धि के साथ अनुमानित 80.75 अरब डॉलर पर पहुंच गया, जो बीते वर्ष की समान अवधि में 72.76 अरब डॉलर था। वहीं कुल आयात 86.93 अरब डॉलर के मुकाबले बढ़कर 94.05 अरब डॉलर रहा। राहत की बात यह रही कि दोनों क्षेत्रों का संयुक्त व्यापार घाटा पिछले साल के 14.17 अरब डॉलर की तुलना में कम होकर 13.30 अरब डॉलर पर सिमट गया।
निर्यात में आई इस तेजी के कारणों को स्पष्ट करते हुए वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने प्रेस ब्रीफिंग में बताया कि विभिन्न मदों के लदान (शिपमेंट) में उल्लेखनीय बढ़ोतरी से यह बढ़त संभव हुई है। उन्होंने रेखांकित किया कि पिछले सितंबर की तुलना में इस बार 44.40 अरब डॉलर का वस्तु निर्यात 23.04 प्रतिशत की ठोस वृद्धि को दर्शाता है। इस गति को बनाए रखने में मुख्य रूप से पेट्रोलियम उत्पादों, इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों, इंजीनियरिंग सामान, रसायनों तथा कृषि उपज के बढ़ते निर्यात ने अहम भूमिका निभाई है।
चालू वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही में निर्यात की गति पहली तिमाही से भी अधिक मजबूत रही। वाणिज्य सचिव के मुताबिक, जुलाई से सितंबर की अवधि का प्रदर्शन अप्रैल-जून तिमाही से कहीं बेहतर साबित हुआ है। दूसरी तिमाही में कुल निर्यात की विकास दर 15.84 प्रतिशत दर्ज की गई, जबकि पहली तिमाही के दौरान यह आंकड़ा 11.84 प्रतिशत पर था।
मंत्रालय की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार, जुलाई-सितंबर 2026 की अवधि में देश का कुल निर्यात अनुमानित रूप से 242.6 अरब डॉलर के स्तर तक पहुंच गया, जो अब तक किसी भी दूसरी तिमाही का सर्वाधिक ऊंचा स्तर है। इससे पूर्व अप्रैल-जून तिमाही में कुल निर्यात 233.6 अरब डॉलर रहा था। यह निरंतर वृद्धि दर्शाती है कि मौजूदा वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं और चुनौतियों के बावजूद भारत का निर्यात क्षेत्र लगातार मजबूत प्रदर्शन कर रहा है।