एससीओ मंच से रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह का स्पष्ट संदेश: संप्रभुता का सम्मान और आतंकवाद का संपूर्ण उन्मूलन ही क्षेत्रीय स्थिरता की बुनियाद

एससीओ मंच से रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह का स्पष्ट संदेश: संप्रभुता का सम्मान और आतंकवाद का संपूर्ण उन्मूलन ही क्षेत्रीय स्थिरता की बुनियाद

ताजिकिस्तान के दुशांबे में आयोजित शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) के शासनाध्यक्षों के सम्मेलन को संबोधित करते हुए भारत के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने आतंकवाद, सुरक्षा और आर्थिक साझेदारी पर देश का आधिकारिक दृष्टिकोण प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि शांतिपूर्ण विकास के मार्ग में आतंकवाद सबसे भीषण बाधा है, जिसे समाप्त करने के लिए संपूर्ण तंत्र पर साझा प्रहार करना अनिवार्य है।

रक्षा मंत्री ने मंच से दो-टूक कहा कि हिंसा और दहशतगर्दी का किसी भी आधार पर बचाव संभव नहीं है। इस विषय पर वैश्विक समुदाय में किसी प्रकार का दोहरा मापदंड स्वीकार्य नहीं हो सकता। आतंकियों को वित्तीय साधन मुहैया कराने, उन्हें लॉजिस्टिक सहायता देने और अपनी जमीन पर शरण देने वाले तत्वों के विरुद्ध भी समान रूप से कड़ी कार्रवाई आवश्यक है, क्योंकि ऐसी प्रवृत्तियां युवाओं के भविष्य और आर्थिक गतिविधियों को सीधे तौर पर नुकसान पहुंचाती हैं।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा बिश्केक सम्मेलन में प्रस्तुत दृष्टि का स्मरण कराते हुए रक्षा मंत्री ने कहा कि संगठन की 25 साल की यात्रा भविष्य के लिए स्पष्ट मार्ग तय करने की मांग करती है। भारत सुरक्षा, सुगम संपर्क और बेहतर अवसरों को एक-दूसरे का पूरक मानता है। जब तक सुरक्षा सुनिश्चित नहीं होगी, तब तक निवेश नहीं आ सकता; और बिना बेहतर संपर्क के व्यापारिक विस्तार संभव नहीं है। भारत सर्वसम्मति से परिणाम देने वाले संगठन के निर्माण के लिए सभी साझेदारों के साथ मिलकर चलने को प्रतिबद्ध है।

आर्थिक मोर्चे पर उन्होंने लचीली आपूर्ति श्रृंखला, आसान निवेश व्यवस्था और तकनीक के व्यापक उपयोग पर बल दिया। भारत ने वर्ष 2026-2030 के आर्थिक सहयोग प्रारूप का अनुमोदन करते हुए स्पष्ट किया कि विकास का दायरा समावेशी होना चाहिए। इसके अतिरिक्त, क्षेत्रीय सुरक्षा चुनौतियों के समाधान हेतु ताशकंद और दुशांबे स्थित केंद्रों की सक्रियता व संस्थागत सामंजस्य को अनिवार्य बताया गया।

क्षेत्रीय संपर्क को लेकर भारत का दृष्टिकोण स्पष्ट करते हुए उन्होंने चाबहार पोर्ट और अंतरराष्ट्रीय उत्तर-दक्षिण ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर (आईएनएसटीसी) की केंद्रीय भूमिका को रेखांकित किया। उन्होंने स्पष्ट चेतावनी दी कि कोई भी संपर्क परियोजना तभी व्यावहारिक और टिकाऊ रह सकती है, जब वह संबंधित देशों की भौगोलिक अखंडता और संप्रभुता की मर्यादा के भीतर हो। उन्होंने हाल ही में मुंबई में आयोजित बुनियादी ढांचा वित्तपोषण संगोष्ठी तथा प्रथम एससीओ एशियाई आर्थिक संवाद में सदस्य देशों के सहयोग की सराहना की।

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