नई दिल्ली। भारत यात्रा पर पहुंचे अमेरिका के स्टेट सेक्रेटरी मार्को रुबियो ने मंगलवार को नई दिल्ली में विदेश मंत्री एस. जयशंकर के साथ द्विपक्षीय वार्ता की। इस बैठक के उपरांत मीडिया से बात करते हुए उन्होंने भारत को अमेरिका का एक अपरिहार्य आर्थिक सहयोगी बताया और विश्वास जताया कि दोनों देशों के बीच प्रस्तावित व्यापार समझौता जल्द ही अंतिम मुकाम पर पहुंचेगा।
मार्को रुबियो ने भारत की लोकतांत्रिक शक्ति और जनसांख्यिकी को रेखांकित करते हुए कहा कि विश्व के सर्वाधिक जनसंख्या वाले और सबसे बड़े लोकतांत्रिक देश के रूप में भारत, अमेरिका के वाणिज्यिक और कारोबारी हितों के लिए अत्यंत मायने रखता है। दोनों देशों के आर्थिक रिश्ते लगातार मजबूत हो रहे हैं।
व्यापारिक समझौते की वर्तमान स्थिति पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि तकनीकी रूप से विदेश विभाग सीधे वाणिज्यिक वार्ताओं का संचालन नहीं करता, फिर भी वे इस पूरी कवायद में लगातार सहयोगी की भूमिका निभा रहे हैं। उन्होंने कहा कि दोनों देश समझौते पर हस्ताक्षर करने के बेहद करीब हैं और किसी औपचारिक यूनियन के बिना जितनी अधिकतम सहमति बन सकती है, वह हासिल की जा चुकी है।
अमेरिकी विदेश मंत्री ने रेखांकित किया कि अब सिर्फ कुछ सीमित और गौण विषयों का निपटारा बाकी रह गया है। उन्हें उम्मीद है कि इन तकनीकी पहलुओं को बिना किसी देरी के जल्द ही सुलझा लिया जाएगा, जिससे दोनों देशों के आर्थिक संबंध एक नए मुकाम पर पहुंचेंगे।
इसके साथ ही, रुबियो ने रूस के निकटवर्ती काला सागर क्षेत्र में जहाजों पर जारी हमलों पर कड़ा रुख जताया। उन्होंने कहा कि अमेरिका लंबे समय से यह पक्ष रखता आया है कि अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों पर पोतों को निशाना बनाया जाना पूरी तरह अनुचित है। अमेरिकी कंपनियों ने औपचारिक तौर पर बताया है कि उनके मालवाहक जहाजों पर बार-बार हमले किए गए हैं, जो कि एक चिंताजनक स्थिति का रूप ले चुका है।
मालूम हो कि अमेरिकी विदेश मंत्री 20 से 22 अक्टूबर तक भारत प्रवास पर हैं। अपने इस पूर्व-निर्धारित कार्यक्रम के तहत वे राजधानी दिल्ली के अलावा मुंबई और गुजरात स्थित जामनगर की यात्रा भी करेंगे।