नई दिल्ली में राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम (NCDC) की महापरिषद की 93वीं बैठक की अध्यक्षता करते हुए केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने निगम को आगामी 25 वर्षों की व्यापक कार्ययोजना बनाने के निर्देश दिए। बैठक के दौरान सहकारी क्षेत्र के वित्तीय पोषण, ग्रामीण रोजगार, संस्थागत मजबूती और भविष्य की प्राथमिकताओं पर गहन मंथन हुआ। केंद्रीय मंत्री ने स्पष्ट किया कि केंद्र सरकार का मुख्य ध्येय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘सहकार से समृद्धि’ संकल्प को आधार बनाकर सहकारिता को समाज के हर तबके तक पहुंचाना और समावेशी विकास सुनिश्चित करना है।
अमित शाह ने विगत पांच वर्षों को NCDC का ‘स्वर्णिम काल’ करार देते हुए बताया कि संस्था ने ऋण वितरण और वित्तीय स्वीकृतियों में अभूतपूर्व बढ़ोतरी दर्ज की है, जबकि नेट एनपीए शून्य पर बना हुआ है। अब देश के प्रत्येक राज्य और केंद्रशासित प्रदेश में निगम की सीधी पहुंच कायम हो चुकी है। उन्होंने रेखांकित किया कि सहकारिता का दायरा केवल नई समितियों के गठन तक सीमित न रहे, बल्कि इसका सीधा लाभ सीमांत कृषकों, पशुपालकों, मछुआरों और ग्रामीण महिलाओं की आय वृद्धि के रूप में सामने आना चाहिए। अमूल, इफको और लिज्जत पापड़ जैसी संस्थाओं का दृष्टांत देते हुए उन्होंने कहा कि सहकारी मूल्यों और पेशेवर प्रबंधन के तालमेल से विश्वस्तरीय संगठन खड़े किए जा सकते हैं।
संस्थागत सुधारों का खाका खींचते हुए सहकारिता मंत्री ने कहा कि पेशेवर विशेषज्ञों और सहकारी प्रतिनिधियों के समूह के माध्यम से कार्यशालाएं आयोजित की जाएं। उन्होंने 31 मार्च 2027 के उपरांत एक विशेष सत्र बुलाकर विस्तृत प्रस्तुतीकरण और दिसंबर 2027 तक ठोस निर्णय लेने की समयसीमा तय की। उन्होंने जोर देकर कहा कि सहकारी संस्थाओं की कार्यशैली पूर्णतः पेशेवर हो, किंतु उनकी आत्मा सहकारी सिद्धांतों से जुड़ी रहे। इसके साथ ही, सरकारी बजट और सरकारी बैंकों पर अति-निर्भरता समाप्त करने के लिए सह-वित्तपोषण तथा नए आर्थिक मॉडल तैयार करने का आह्वान किया गया।
क्षेत्रीय प्राथमिकताओं पर चर्चा करते हुए केंद्रीय मंत्री ने वर्ष 2030 तक पूर्वोत्तर भारत को डेयरी, पशुपालन और मत्स्य पालन में पूर्ण आत्मनिर्भर बनाने का लक्ष्य रखा। उन्होंने कहा कि इस रणनीतिक कदम से पूर्वोत्तर की अर्थव्यवस्था में लगभग 32,800 करोड़ रुपये का इजाफा होगा और तकरीबन 8 लाख रोजगार के नए अवसर बनेंगे। मत्स्य क्षेत्र के लिए उन्होंने उल्लेख किया कि गहरे समुद्र में उतरने वाले करीब 100 ट्रॉलरों को वित्तीय सहायता दी जा चुकी है, जिससे मछुआरा परिवारों का जीवन स्तर सुधरेगा। इसके अतिरिक्त, चीनी मिलों के लिए साझा औद्योगिक प्रसंस्करण और चक्रीय अर्थव्यवस्था आधारित मॉडल विकसित करने की बात कही, जिससे महाराष्ट्र के कोल्हापुर और पुणे जैसी बहुराज्यीय पहलों के जरिए छोटी मिलों को सीधा संबल मिल सके।
आगामी वर्षों के लिए NCDC के वित्तीय संवितरण के महत्वाकांक्षी लक्ष्य तय किए गए। इसके अंतर्गत वित्त वर्ष 2026-27 में 1.70 लाख करोड़, 2027-28 में 2.10 लाख करोड़, 2028-29 में 2.50 लाख करोड़ और 2029-30 व 2030-31 तक इसे 3.50 लाख करोड़ रुपये तक पहुंचाने का निर्देश दिया गया। इन लक्ष्यों की पूर्ति हेतु नाबार्ड, राज्य सहकारी बैंकों और वाणिज्यिक बैंकों के साथ कंसोर्टियम बनाने पर बल दिया गया। युवाओं को जोड़ने के लिए ‘सहकार मित्र’ इंटर्नशिप योजना और बनास डेयरी के सफल मॉडल से सीख लेने की सलाह दी गई।
बैठक में प्रस्तुत वित्तीय आंकड़ों के अनुसार, सहकारिता मंत्रालय की स्थापना से लेकर अक्टूबर 2026 तक NCDC ने 4.14 लाख करोड़ रुपये से अधिक की सहायता राशि वितरित की है। वित्त वर्ष 2025-26 में 1,55,408 करोड़ रुपये की परियोजनाओं की मंजूरी और 1,27,596 करोड़ रुपये का वितरण दर्ज हुआ, जो 2020-21 के 24,733 करोड़ रुपये की तुलना में बहुत बड़ा उछाल है। इसी वित्त वर्ष में 1,475 करोड़ रुपये का शुद्ध लाभ और 99.84 प्रतिशत ऋण वसूली दर्ज की गई। NCDC संशोधन अधिनियम 2026 के तहत केंद्र की 2,000 करोड़ रुपये की सहायता से बाजार से 20,000 करोड़ रुपये जुटाने का मार्ग प्रशस्त हुआ है, जिसके तहत वित्त वर्ष 2025-26 में 9,380 करोड़ और 2026-27 में 25 अक्टूबर तक 6,172 करोड़ रुपये बांटे जा चुके हैं। निगम ने 1,863 एफपीओ का पंजीकरण कराया है, ‘सहकार नवाचार योजना’ के तहत 10 करोड़ के कोष से नवाचारों को 25 लाख रुपये तक का शत-प्रतिशत अनुदान उपलब्ध कराया जा रहा है, और LINAC अकादमी के जरिए 21,688 कर्मियों को प्रशिक्षित किया गया है।