स्वास्थ्य मंत्री ने किया एम्स का दौरा: स्वच्छता, संसाधन प्रबंधन और 897 क्षमता वाले ‘आश्रय’ प्रतीक्षालय का निरीक्षण

स्वास्थ्य मंत्री ने किया एम्स का दौरा: स्वच्छता, संसाधन प्रबंधन और 897 क्षमता वाले ‘आश्रय’ प्रतीक्षालय का निरीक्षण

नई दिल्ली स्थित एम्स में विशेष अभियान 6 के तहत संचालित स्वच्छता एवं संसाधन प्रबंधन कार्यों की प्रगति देखने बुधवार को केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जगत प्रकाश नड्डा पहुंचे। इस दौरान उन्होंने ट्रॉमा सेंटर विस्तार परिसर में तीमारदारों के लिए नवनिर्मित बड़े प्रतीक्षालय का जायजा लिया और संस्थान में पर्यावरण संरक्षण से जुड़े नवाचारों का मूल्यांकन किया।

समीक्षा के केंद्र में रहा 2,970 वर्ग मीटर में फैला नवनिर्मित ‘आश्रय’ शेल्टर, जिसे बीईएल (गाजियाबाद) ने अपनी सीएसआर पहल के माध्यम से तैयार किया है। कुल 897 लोगों के बैठने की क्षमता वाला यह शेल्टर मौसम की मार झेलने वाले मरीजों के परिजनों को एक सुरक्षित और स्वच्छ विकल्प देगा। इससे परिसर के बाहर तंबू लगाने या खुले में रात बिताने की मजबूरी समाप्त होगी। यह 24 घंटे चलने वाला केंद्र विशेषकर दिल्ली से बाहर के राज्यों से उपचार कराने पहुंचे जरूरतमंद परिवारों को राहत देगा।

सफाई व्यवस्था को सुदृढ़ करने के उपायों पर चर्चा करते हुए अधिकारियों ने बताया कि ओपीडी और इमरजेंसी शौचालयों के लिए अलग सफाई दल तैनात किए गए हैं। सामूहिक धुलाई (गैंग वॉशिंग) और ओपीडी समय के बाद गहन सफाई की नीति लागू है। कर्मियों के कल्याण का ध्यान रखते हुए समय पर मानदेय, समुचित उपकरण और व्यावहारिक प्रशिक्षण की निगरानी की जा रही है। स्वास्थ्य मंत्री ने मैदानी स्तर पर काम करने वाले स्वच्छता कर्मियों से मिलकर कहा कि अस्पतालों को संक्रमण मुक्त बनाए रखने में उनकी भूमिका रीढ़ के समान है।

संसाधनों की बचत के मोर्चे पर एम्स ने तकनीकी दक्षता का प्रदर्शन किया है। परिसर के 11 सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट्स से शोधित होने वाला 19.6 लाख लीटर पानी हर दिन बागवानी में पुनः उपयोग किया जा रहा है। ऊर्जा बचत के लिए एयर कंडीशनिंग के संतुलित प्रयोग जैसे उपायों से जनवरी से अक्टूबर 2025 के दौरान बिजली खपत 7.68 लाख यूनिट कम हुई, जिससे वर्ष 2024 के मुकाबले 1.98 करोड़ रुपये की सीधी वित्तीय बचत हुई।

इसके अतिरिक्त, मरीजों और परिजनों की आवाजाही सुगम बनाने के लिए 40 निशुल्क इलेक्ट्रिक शटल गाड़ियां चलाई जा रही हैं, जिन्हें सहारा देने के लिए 30 स्मार्ट चार्जर और 114 चार्जिंग पॉइंट सक्रिय हैं। यह पूरी पहल दर्शाती है कि सार्वजनिक स्वास्थ्य केंद्रों में बेहतर रोगी सेवा और पर्यावरण संरक्षण साथ-साथ चल सकते हैं, जिसे मंत्रालय अब दीर्घकालिक व्यवस्था के रूप में स्थापित कर रहा है।

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