अमेरिकी सेना ने सोमवार रात को अफगानिस्तान छोड़ दिया। उसके जाते ही तालिबान ने काबुल एयरपोर्ट पर कब्जा कर लिया। लेकिन यहां रखे विमानों को तालिबान कभी इस्तेमाल नहीं कर पाएगा। ऐसा इसलिए, क्योंकि अमेरिकी सेना इन विमानों को निष्क्रिय कर गई है।
सेंट्रल कमांड के हेड जेनरल केनेथ मैकेंजी ने कहा कि 73 एयरक्राफ्ट जो हामिद करजई इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर रखे हैं, उन्हें डिसेबल कर दिया गया है। मैकेंजी ने कहा- ‘ये विमान अब कभी नहीं उड़ेंगे… इन्हें कभी कोई ऑपरेट नहीं कर पाएगा। हालांकि इनमें से ज्यादातर विमान मिशन के लिहाज से नहीं बनाए गए थे, लेकिन फिर भी इन्हें कभी कोई उड़ा नहीं सकेगा।’
मैकेंजी ने यह भी कहा कि अमेरिकी सेना करीब 70 माइन रेजिसटेंट ऐंबुश प्रोटेक्शन (MRAP) व्हीकल एयरपोर्ट पर छोड़ आई है। यह व्हीकल IED अटैक और दुश्मन के हमलों को झेल सकता है। एक व्हीकल की कीमत 10 लाख डॉलर तक होती है। सेना ने इन्हें भी डिसेबल कर दिया है।
तालिबान के अल्टीमेटम (31 अगस्त) से पहले ही अमेरिकी सेना ने अफगानिस्तान छोड़ दिया। रात करीब 12 बजे काबुल एयरपोर्ट से सेना का आखिरी दल रवाना हुआ। इसके साथ ही अमेरिकी सेना के यहां 20 साल चले संघर्ष का अंत हो गया। इधर, अमेरिकी सेना की विदाई हुई और उधर तालिबान ने अफगानिस्तान की आजादी का ऐलान कर दिया। तालिबान ने कहा है कि इस जंग में हमारी जीत हुई है। यह घुसपैठियों के लिए एक सबक है।
काबुल एयरपोर्ट पर मीडिया से बात करते हुए तालिबान के प्रवक्ता जबीउल्लाह मुजाहिद ने कहा, ‘यह ऐतिहासिक मौका है और हमारा मुल्क अब आजाद है। मैं सभी अफगानियों को जीत की बधाई देता हूं। हम अमेरिका समेत पूरी दुनिया के साथ अच्छे रिश्ते कायम करना चाहते हैं।’
तालिबान के साथ हुए समझौते के तहत अमेरिका को 31 अगस्त तक पूरी तरह अफगानिस्तान को छोड़ देना था। लेकिन अमेरिका चौबीस घंटे पहले ही अफगानिस्तान से निकल गया। जैसे ही अमेरिका के चार सैन्य परिवहन विमानों सी-17 ने काबुल एयरपोर्ट से उड़ान भरी, तालिबान के लड़ाकों ने जश्न में फायरिंग शुरू कर दी।