परमबीर सिंह पर जबरन उगाही का आरोप:ठाणे की कोर्ट ने जारी किया गैर जमानती वारंट

कई दिनों से गायब चल रहे मुंबई के पूर्व पुलिस कमिश्नर परमबीर सिंह को बड़ा झटका लगा है। ठाणे की कोर्ट ने ठाणे पुलिस की अर्जी पर इनके खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी कर दिया है। परमबीर के खिलाफ ऐसी ही एक और याचिका मुंबई पुलिस ने किला कोर्ट में दायर की है, इस पर 29 अक्टूबर को सुनवाई होनी है। परमबीर के खिलाफ चांदीवाल कमीशन ने भी जमानती वारंट जारी किया है।

ठाणे पुलिस ने परमबीर सिंह के खिलाफ हाल ही में लुकआउट नोटिस जारी किया था। फिरौती और उगाही के मामले में ठाणे में केतन तन्ना द्वारा परमबीर सिंह सहित 28 लोगों पर केस दर्ज कराया था। केतन ने परमबीर पर झूठे आरोप में फंसा कर उगाही करने का आरोप लगाया था। केस के सभी 28 आरोपियों के खिलाफ लुकआउट नोटिस जारी किया गया है। मामले के कुछ आरोपी पहले से जेल में है। अन्य आरोपी विदेश न भाग जाए, इसलिए यह लुकआउट नोटिस जारी किया गया था। हालांकि, इसके बावजूद परमबीर सिंह गायब हैं।

मुंबई क्राइम ब्रांच ने उन्हें नौ अक्तूबर को वसूली मामले में पूछताछ के लिए समन भेजा था। लेकिन, न वो खुद आए न उनकी तरफ से कोई जवाब ही आया। महाराष्ट्र राज्य के गृह विभाग ने मुंबई के पूर्व पुलिस कमिश्नर परमबीर सिंह को भगोड़ा घोषित करने की लीगल प्रोसेस शुरू कर दी है। गृह विभाग ने इंटेलिजेंस ब्यूरो से भी परमबीर का पता लगाने में मदद मांगी है।परमबीर सिंह स्वास्थ्य कारणों से छुट्टी पर जाने के बाद से मई से लापता हैं। सिंह को उनके चंडीगढ़ स्थित आवास पर कई पत्र भेजे गए और उनके ठिकानों के बारे में पूछताछ की गई, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला। पिछले महीने, गृह मंत्री दिलीप वालसे पाटिल ने कहा था कि वे आईपीएस अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए अखिल भारतीय सेवा (आचरण) नियमों के प्रावधानों को देख रहे हैं।दक्षिण मुंबई में उद्योगपति मुकेश अंबानी के आवास एंटीलिया के पास विस्फोटकों वाली एसयूवी मिलने के मामले में मुंबई पुलिस के अधिकारी (एपीआई) सचिन वाजे को गिरफ्तार किए जाने के बाद परमबीर सिंह को भी मुंबई पुलिस प्रमुख के पद से हटा दिया गया और होमगार्ड में स्थानांतरित कर दिया गया था।

इसके बाद परमबीर सिंह ने राज्य के तत्कालीन गृह मंत्री अनिल देशमुख पर वसूली का आरोप लगाते कि देशमुख ने सचिन वाजे को मुंबई के होटलों और बार से हर महीने 100 करोड़ रुपये लेने के लिए कहा था। हालांकि इस आरोप से देशमुख ने इनकार किया है। उधर, महाराष्ट्र के गृह विभाग के अधिकारियों के मुताबिक, परमबीर सिंह को भगोड़ा घोषित करने की कानूनी प्रक्रिया भी शुरू हो गई है।

पिछले सप्ताह जांच के लिए बनाए गए चांदीवाल आयोग की कार्रवाई के दौरान मुंबई में सीनियर एडवोकेट अभिनव चंद्रचूड़ और आसिफ लम्पवाला, पूर्व पुलिस कमिश्नर परमबीर सिंह की ओर से पेश हुए और उनकी ओर से पावर ऑफ अटॉर्नी के साथ दिए गए एक हलफनामे को दायर किया। यह पावर ऑफ अटॉर्नी चंडीगढ़ में बनाई गई है और इसमें कहा गया है कि महेश पांचाल नाम के शख्स को जांच आयोग में परमबीर सिंह का प्रतिनिधित्व करने का अधिकार दिया गया है। हलफनामे में आगे कहा गया कि परमबीर सिंह का समिति के समक्ष कोई निवेदन करने का इरादा नहीं है।

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