शोधकर्ता ने किया दावा- वुहान लैब में वायरस बनाने और लीक होने की आशंका सबसे ज्यादा

कोरोना की शुरुआत कहां से हुई, इसे लेकर कनाडा की एक मॉलिक्यूलर बायोलॉजिस्ट ने पुराने दावे पर जोर दिया है। बुधवार को ब्रिटेन की संसद के एक पैनल को उन्होंने बताया कि वुहान की एक लैब से कोरोना वायरस के लीक होने का दावा सबसे सटीक हो सकता है। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि इस वायरस को लैब में तैयार किया गया था। इसके प्राकृतिक रूप से मिलने का कोई प्रमाण नहीं है।

जीन थेरेपी और सेल इंजीनियरिंग की विशेषज्ञ और ‘वायरल: द सर्च फॉर द ओरिजिन ऑफ कोविड-19’ की सह-लेखिका डॉ. अलीना चान ने संसद के पैनल को बताया कि कोरोना महामारी कोरोनावायरस के एक खास फीचर ‘फ्युरिन क्लीवेज साइट’ के कारण फैली थी। इस फीचर के बिना संभावना ही नहीं थी कि यह महामारी फलती। यह फीचर वुहान इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी से आने की दावे किए जाते रहे हैं।जब पैनल ने उनसे पूछा कि लैब लीक की आशंका कितनी प्रतिशित है, तो चान ने कहा कि कोरोनावायरस के प्राकृतिक उद्गम से ज्यादा इसके लैब में बनाए जाने की आशंका है। उन्होंने बताया कि हम सभी यह बात मानते हैं कि चीन के हुआनन सीफूड मार्केट में एक घटना घटी, जिसे कोरोनावायरस का सुपर स्प्रेडर माना गया, लेकिन इस बात का कोई पुख्ता प्रमाण नहीं है कि इस बाजार में किसी जानवर की वजह से प्राकृतिक तरीके से वायरस फैला।

​​​​​​क्या वायरस के लीक होने से पहले उसे लैब में मॉडिफाई किया गया, इस सवाल के जवाब में चान ने कहा कि हमने कई शीर्ष वायरोलॉजिस्ट्स से सुना है कि इसकी पूरी आशंका है कि इस वायरस को जेनिटिकली इंजीनियर करके फैलाया गया। यह दावा वे वायरोलॉजिस्ट भी करते हैं जिन्होंने खुद SARS वायरस में बदलाव किया था।

चान ने कहा कि जो लोग इस महामारी की शुरुआत के बारे में जानकारी रखते हैं उनके लिए अभी सामने आना खतरनाक होगा। हो सकता है कि वे लोग पांच साल या 50 साल बाद सामने आएं। हम ऐसी दुनिया मे जी रहे हैं, जहां बहुत सारा डाटा एकत्र किया जा रहा है। हमें अब सिर्फ एक भरोसेमंद और व्यवस्थित इंवेस्टिगेशन सिस्टम की जरूरत है।

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