अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन को सत्ता में आए एक साल पूरा हो चुका है। उनके कई सवालों पर सवालिया निशान लगते रहे हैं, लेकिन अफगानिस्तान से सैन्य वापसी पर उनसे अब भी सवाल पूछे जा रहे हैं। गुरुवार को इसी मसले से संबंधित एक सवाल पर बाइडेन ने कहा- अफगानिस्तान में कोई सरकार कामयाब नहीं हो सकती और न उसे एक मुल्क के तौर पर एकजुट रख सकती। हमने वहां 20 साल तक हर हफ्ते लाखों डॉलर खर्च करके देख लिया। हमेशा के लिए ऐसा नहीं किया जा सकता।
व्हाइट हाउस में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान बाइडेन ने कहा- मैं जानता हूं आप लोगों को फोकस अफगानिस्तान पर है, आपके सवाल जायज हैं। अगर आपको लगता है कि वहां कोई एक सरकार शासन कर सकती है तो हाथ उठाकर जवाब दीजिए। अफगानिस्तान का इतिहास बताता है कि वो साम्राज्यों के लिए कब्रगाह साबित हुआ है। वहां एकता कायम करना बेहद मुश्किल है।
एक सवाल के जवाब में बाइडेन ने कहा- पिछले साल जनवरी में जब मैंने सत्ता संभाली तो मेरे सामने बड़ा सवाल यह था कि क्या हम पहले की तरह हर हफ्ते वहां डॉलर्स बहाते रहें। हमारे सैनिकों की लाशें हर हफ्ते देश वापस आ रहीं थीं। इसलिए वहां से सैन्य वापसी का फैसला किया गया, क्योंकि हम ताउम्र ऐसा नहीं कर सकते।
बाइडेन का तर्क सही हो सकता है, लेकिन हाल ही में एक सर्वे में 10 में से 7 अमेरिकी बुजुर्गों ने इस फैसले को गलत बताया। ब्रुकिंग्स इंस्टीट्यूशन के मुताबिक- अमेरिका में 7 लाख 75 हजार पूर्व सैनिक ऐसे हैं जिन्होंने अफगान जंग लड़ी। इनमें से 73% मानते हैं कि बाइडेन का फैसला साबित करता है कि अमेरिका वहां हार गया।
गुरुवार को मीडिया के सामने बाइडेन ने माना कि लोग उनके फैसले से निराश और नाराज हैं, लेकिन उन्हें अपने फैसले पर कोई अफसोस नहीं क्योंकि यह अमेरिका और यहां के लोगों के हित में था। बाइडेन ने कहा- हमारी सेना भी इस फैसले से सहमत थी। 20 साल बाद वहां से निकलना आसान नहीं था।
अमेरिकी सेना ने पिछले साल अगस्त में अफगानिस्तान से वापसी शुरू की थी। 15 अगस्त को वहां तालिबान ने कब्जा कर लिया था।