छत्तीसगढ़ में 91वां विधायक लाने की तैयारी:

छत्तीसगढ़ में 91वां विधायक लाने की तैयारी:

नब्बे सीटों वाली छत्तीसगढ़ विधानसभा में 91वां विधायक लाने की तैयारी शुरू हो चुकी है। सरकार एंग्लो इंडियन समाज के प्रतिनिधि के तौर पर एक विधायक मनोनीत करने जा रही है। यह नियुक्ति तीन साल से नहीं हो पाई है। बताया जा रहा है विधानसभा के बजट सत्र में नए विधायक को शपथ दिला दी जाएगी।

विधानसभा के लिए 2018 में हुए चुनाव में कांग्रेस भारी बहुमत से जीतकर सत्ता में लौटी थी। भारी बहुमत की वजह से मंत्रिमंडल के गठन और दूसरी राजनीतिक नियुक्तियों में कांग्रेस को भारी मशक्कत करनी पड़ रही थी। इस बीच पार्टी में एंग्लो इंडियन विधायक की नियुक्ति के लिए भी लॉबिंग शुरू हुई थी। आधा दर्जन से अधिक दावेदार सक्रिय थे, लेकिन उस समय सरकार ने इसे टाल दिया। अब सरकार के तीन साल पूरे होने के बाद कवायद फिर शुरू हुई है।

बताया जा रहा है, कम से कम दो दावेदारों ने हाल ही में मुख्यमंत्री भूपेश बघेल से मुलाकात की है। मुख्यमंत्री इस मुद्दे पर हाईकमान से चर्चा करने वाले हैं। उनके अनुमोदन के बाद जल्दी ही उनकी नियुक्ति की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी। इस नियुक्ति के बाद सदन में कांग्रेस के विधायकों की संख्या बढ़कर 71 हो जाएगी। छत्तीसगढ़ राज्य गठन के बाद से अब तक विधानसभा में किसी एक दल के विधायकों की यह सबसे बड़ी संख्या होगी।

राज्य गठन के बाद से अब तक तीन लोग ही एंग्लो इंडियन विधायक मनोनीत हुए हैं। कांग्रेस ने पहले कार्यकाल में इंग्रीड मैक्लाउड को विधायक बनाया था। बाद में वे लोकसभा में भी मनोनीत हुईं। भाजपा ने पहले कार्यकाल में रोजलीन बैकमेन को विधायक बनाया। तीसरी और चौथी विधानसभा में बर्नार्ड रोड्रिग्ज को एंग्लो इंडियन कोटे से विधायक बनाया गया।एंग्लो इंडियन का मतलब है ऐसे लोग जिनके माता-पिता में से कोई एक यूरोपीय मूल का हो। 15 अगस्त 1947 को भारत से अंग्रेज विदा हो गए, लेकिन यूरोपीय मूल के करीब 30 हजार लोगों ने भारत को ही जन्मभूमि मानकर जाने से इनकार कर दिया। भारत में रह गए यूरोपीय मूल के लाेगाें को ही एंग्लो इंडियन कहा जाता है। भारत में अभी एंग्लो इंडियन समुदाय के 4 लाख से अधिक लोग हैं। छत्तीसगढ़ में इनकी आबादी करीब दो हजार बताई जाती है। इनमें से अधिकतर लोग बिलासपुर में ही रहते हैं।संविधानिक प्रावधानों के मुताबिक अगर सरकार को लगता है कि राज्य विधानसभा में इस वर्ग का पर्याप्त प्रतिनिधित्व नहीं है तो एक व्यक्ति को विधायक मनोनीत कर सकती है। मुख्यमंत्री की सिफारिश पर यह नियुक्ति राज्यपाल करते हैं। सदन में इन विधायकों को भी निर्वाचित विधायकों की तरह अधिकार और सुविधाएं मिलती हैं। मनोनीत विधायक केवल राज्य सभा और राष्ट्रपति चुनाव में मतदान नहीं कर सकते।

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