रूस और यूक्रेन के बीच टैंक, तोप और एयरक्राफ्ट से शुरू हुई जंग बायोलॉजिकल और केमिकल हथियारों तक पहुंच गई है। रूस का आरोप है कि यूक्रेन अमेरिका के साथ मिलकर बायोलॉजिकल और केमिकल वेपन तैयार कर रहा है। वहीं, यूक्रेन ने रूस को चेतावनी दी है कि अगर इन हथियारों का उसके खिलाफ इस्तेमाल किया तो रूस को और ज्यादा कड़े प्रतिबंधों का सामना करना पड़ेगा।
केमिकल वेपन मतलब टॉक्सिक केमिकल और जहर का इस्तेमाल करना। इन्हें वॉटर सप्लाई, हवा और खाने में देकर लोगों को मारा जाता है। वहीं, बायोलॉजिकल वेपन का मतलब बैक्टीरिया और वायरस जैसे नेचुरल सोर्स की मदद से लोगों को बीमार करके मारना। दोनों का ही इस्तेमाल जंग के दौरान एक पूरे इलाके के लोगों को मारने के लिए किया जा सकता है। इनका असर आने वाली कई पीढ़ियों पर भी रहता है। जिसकी वजह से बच्चे शारीरिक और मानसिक रूप से अपंग पैदा होते हैं। दोनों ही हथियार लोगों को तड़पा कर मारते हैं।
1937 में मंगोलियाई सेना ने प्लेग से संक्रमित शवों को ब्लैक-सी के किनारे फेंका था। यह बायोलॉजिकल वेपन के इस्तेमाल का पहला उदाहरण था। अब तक जर्मनी, अमेरिका, रूस और चीन समेत 17 देश बायोलॉजिकल हथियार बना चुके हैं। चीन पर कोरोना को बायोलॉजिकल हथियार की तरह इस्तेमाल करने का आरोप लग चुका है।रूसी डिप्लोमैट वेजली नेबेनजाया ने आरोप लगाया है कि यूक्रेन अमेरिका की मदद से करीब 30 बायो वेपन प्रोग्राम चल रहा है। यूक्रेन चमगादड़ों और अन्य प्रवासी पक्षियों के जरिए रूस में बीमारी फैलाने की साजिश रच रहा है। रूस ने इस मुद्दे पर चर्चा के लए संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की बैठक भी बुलाई थी।
अमेरिका ने रूस के इन दावों को खारिज करते हुए आरोप लगाया है कि रूस चेर्नोबिल एटमी प्लांट पर धोखे से हमला कर इसकी आड़ में यूक्रेन पर केमिकल हथियारों का इस्तेमाल कर सकता है। वहीं, यूक्रेन के राष्ट्रपति जेलेंस्की का कहना है कि मैं एक योग्य देश का राष्ट्रपति और दो बच्चों का पिता हूं। मेरी जमीन पर कोई बायोलॉजिकल और केमिकल हथियार नहीं है।
यूक्रेन के रक्षा मंत्रालय का दावा है कि उसने रूसी सैनिकों से रासायनिक युद्ध उपकरण हासिल किए हैं। इसकी तस्वीर भी सोशल मीडिया पर शेयर की है। पश्चिमी देश भी चेतावनी दे चुके हैं कि पुतिन यूक्रेन के खिलाफ रासायनिक हमले की तैयारी कर रहे हैं।