असम मेघालय सीमा विवाद:सुलझा 50 साल पुराना मसला

असम मेघालय सीमा विवाद:सुलझा 50 साल पुराना मसला

असम और मेघालय की राज्य सरकारें 50 साल पुराने सीमा विवाद को सुलझना शुरू हो गया है। दोनों राज्यों के CM हिमंत बिस्वा सरमा और कॉनराड कोंगकल संगमा ने मंगलवार को राजधानी दिल्ली में एक समझौते पर हस्ताक्षर किए। इसके बाद 12 सबसे ज्यादा विवादित क्षेत्रों में से 6 की राज्य सीमा निर्धारित हो गई है। MoU साइन करने के दौरान गृहमंत्री अमित शाह भी मौजूद रहे।MoU पर साइन करने के बाद असम के सीएम हिमंत बिस्वा सरमा ने कहा कि यह हमारे लिए ऐतिहासिक दिन है। इस एमओयू के बाद अगले 6-7 महीनों में बाकी विवादित जगहों की समस्या का समाधान करना हमारा लक्ष्य है। हम पूर्वोत्तर क्षेत्र को देश के विकास का इंजन बनाने की दिशा में काम करेंगे।

असम और मेघालय के मुख्यमंत्रियों ने गृह मंत्रालय के पास जांच और विचार के लिए एक मसौदा भेजा था। असम और मेघालय की सरकारें 884 किलोमीटर की सीमा पर 12 में से 6 में सीमा विवाद हल करने सहमत हैं। 36.79 वर्ग किमी जमीन के लिए भेजी गई सिफारिशों के मुताबिक असम अपने पास 18.51 वर्ग किमी हिस्सा रखेगा और बाकी 18.28 वर्ग किमी मेघालय को देगा।

दोनों राज्यों के बीच हुआ यह समझौता बेहद महत्वपूर्ण है क्योंकि विवाद बहुत लंबे समय से चल रहा है। इसकी शुरुआत 1972 में हुई थी जब मेघालय को असम से अलग कर दिया गया था। नया राज्य बनाने के लिए हुए समझौते में सीमांकन के दौरान ही कई इलाकों को लेकर विवाद सामने आए थे।असम-मेघालय सीमा विवाद से जुड़े 6 क्षेत्र ताराबारी, गिजांग, हाहिम, बोकलापारा, खानापारा-पिलंगकाटा और रातचेरा हैं। जो मेघालय में पश्चिम खासी हिल्स, री-भोई और पूर्वी जयंतिया हिल्स जिलों का और असम की ओर से कछार, कामरूप (मेट्रो) और कामरूप जिलों का हिस्सा हैं। अंतरराज्यीय सीमा से सटे 36 विवादित गांवों में से 30, जिनका कुल भौगोलिक क्षेत्रफल 18.29 वर्ग किमी है, मेघालय में रहेगा जबकि 18.51 वर्ग किमी असम में आया है।

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