लगभग दिवालिया हो चुके श्रीलंका ने अब 51 अरब डॉलर (3.8 लाख करोड़ भारतीय रुपए) का विदेशी कर्ज चुकाने से हाथ खड़े कर दिए हैं। खाने-पीने का सामान और फ्यूल डिमांड पूरी करने के लिए श्रीलंका ने ये कदम उठाया है। फॉरेन एक्सचेंज रिजर्व खाली हो चुका है और उसके पास काफी कम डॉलर बचे हैं। अगर वो कर्ज चुकाने का फैसला लेता तो फूड प्रोडक्ट्स और फ्यूल इंपोर्ट करने के लिए उसके पास डॉलर नहीं बचते। इससे हालात और बेकाबू हो जाते।
श्रीलंका के वित्त मंत्रालय ने मंगलवार को एक बयान में कहा- बॉन्ड होल्डर्स, बाइलेटरल क्रेडिटर्स और इंस्टीट्यूशनल लेंडर्स के सभी बकाया पेमेंट डेट रिस्ट्रक्चर तक सस्पेंड रहेंगे। आसान शब्दों में कहें तो वित्त मंत्रालय फिलहाल कोई विदेशी कर्ज नहीं लौटाएगा। इनकी तारीखें तय की जाएंगी। मिनिस्ट्री के मुताबिक- सरकार IMF के साथ बेलआउट पैकेज के लिए बातचीत में तेजी लाएगी। दूसरी तरफ, केंद्रीय बैंक के गवर्नर नंदलाल वीरसिंघे ने कहा- अधिकारी लेनदारों के साथ डिफॉल्ट पर बातचीत कर रहे हैं।श्रीलंका का विदेशी मुद्रा भंडार पिछले महीने 16% गिरकर 1.94 अरब डॉलर पर आ गया जबकि उसे 2022 में 7 अरब डॉलर का कर्ज चुकाना है। अब श्रीलंका के पास IMF के बेलआउट पैकेज का ही सहारा बचा है। सरकार को 18 अप्रैल को 2023 डॉलर बॉन्ड के लिए 36 मिलियन डॉलर और 2028 बॉन्ड के लिए 42.2 मिलियन डॉलर का ब्याज भुगतान करना है। एक अरब डॉलर का सॉवरेन बॉन्ड 25 जुलाई को मैच्योर हो रहा है।डिफॉल्ट की घोषणा से श्रीलंका के राष्ट्रपति गोटबाया राजपक्षे और उनके भाई, प्रधानमंत्री महिंदा राजपक्षे पर पद छोड़ने का दबाव बढ़ गया है। लगातार बढ़ती महंगाई के खिलाफ बढ़ते नागरिक विरोधों के बावजूद वे अब तक अपने पद पर बने हुए हैं। श्रीलंका में महंगाई दर 20% तक पहुंच गई है और 13 घंटे तक बिजली कटौती हो रही है। राजपक्षे की पार्टी ने संसद में अपना बहुमत भी खो दिया है।एवेन्यू एसेट मैनेजमेंट में फिक्स्ड इनकम के हेड कार्ल वोंग ने कहा, ‘बाजार को पहले से ही इस डिफॉल्ट की आशंका थी। अब हमें यह देखना होगा कि नई सरकार IMF से बात करते हुए स्थिति को कैसे संभालती है।’ श्रीलंका के वित्त मंत्रालय ने कहा कि विदेशी लेनदार मंगलवार शाम 5 बजे (श्रीलंकाई समयानुसार) के बाद अपने कर्ज पर ब्याज या कर्ज राशि श्रीलंकाई रुपए में वापस ले सकते हैं। इस विकल्प को चुनने के लिए वह पूरी तरह स्वतंत्र है।