छत्तीसगढ़ में महज दो किसानों के लिए एक बार फिर से धान खरीदी पोर्टल खोला गया। खरीदी खत्म होने के 64 दिन बाद दोनों किसानों से समर्थन मूल्य पर शासन ने 859 क्विंटल धान की खरीदी की। यह सारी कवायद हाईकोर्ट के आदेश के बाद की गई है। दोनों किसानों का आरोप है कि तहसीलदार की मनमानी के चलते उनका पुटीडीह उपार्जन केंद्र में पंजीयन नहीं हो सका था। इसके बाद दोनों ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।
जानकारी के मुताबिक, भेड़ीकोना गांव के किसान गौरीशंकर पटेल और हरिशंकर पटेल की संयुक्त खाते में कृषि भूमि है। दोनों किसानों ने तहसीलदार डभरा को धान खरीदी के लिए पंजीयन का आवेदन दिया था। इसके बाद भी उनका पंजीयन नहीं हुआ और वे धान नहीं बेच सके। इस पर दोनों किसानों ने अधिवक्ता तेजस पटेल के माध्यम से हाईकोर्ट में याचिका दायर कर दी। इस पर 27 जनवरी को हाईकोर्ट ने आदेश दिया कि इस काम को दो महीने में पूरा कराया जाए।
कोर्ट के आदेश के बाद भी तय समय सीमा पर कार्यवाही नहीं हुई। इस पर दोनों किसानों ने जांजगीर-चांपा कलेक्टर और डभरा तहसीलदार के खिलाफ अवमानना याचिका दायर कर दी। इस पर कोर्ट ने नोटिस जारी किया, लेकिन फिर भी कुछ नहीं हुआ। इसके बाद किसानों ने फिर याचिका लगाई। इस पर कोर्ट ने मुख्य सचिव से लेकर अन्य अफसरों को निर्देश जारी किए। इसके बाद 11 अप्रैल को पोर्टल खोला गया और धान खरीदी की गई।
जिला खाद्य अधिकारी ने बताया कि भेड़ीकोना गांव के किसान गौरीशंकर पटेल और हरिशंकर पटेल की संयुक्त खाते में कृषि भूमि है। दोनों किसानों ने तहसीलदार डभरा को आवेदन कर धान खरीदी के लिए गुहार लगाई थी, लेकिन किसी खामी की वजह से उनका पंजीयन नहीं हो सका। इसके चलते दोनों किसान धान बेचने से वंचित हो गए। इसके बाद इन किसानों ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की। कोर्ट के निर्देश पर धान खरीदी कर ली गई है।
छत्तीसगढ़ शासन की ओर से समर्थन मूल्य पर पहले 31 जनवरी तक धान खरीदी की समय सीमा तय की गई थी, मगर उसे किसानों की मांग पर 7 दिन बढ़ाया गया था। इसके बाद समर्थन मूल्य पर धान खरीदी की अंतिम तारीख 7 फरवरी तक कर दी गई। इसके 64 दिनों के बाद इन दोनों किसानों का धान हाईकोर्ट के निर्देश पर खरीदा गया है।