नवा रायपुर में आंदोलन कर रहे 27 गांव के किसानों ने धरने का नया ठिकाना बना लिया है। रविवार तड़के प्रशासन ने उन्हें नवा रायपुर विकास प्राधिकरण (NRDA) परिसर से जबरन हटा दिया था। अब किसान वहां से हटकर कयाबांधा गांव के बाहर आम के बगीचे में बैठ गए हैं। इसी स्थान पर सोमवार को दोपहर में सभी प्रभावित ग्रामीणों की एक पंचायत होनी है। किसानों की जमीन मुआवजे सहित कई मांगें हैं।
आंदोलन का नेतृत्व कर रहे नई राजधानी प्रभावित किसान कल्याण समिति के अध्यक्ष रूपन चंद्राकर ने बताया, प्रशासन ने किसान आंदोलन पर हमला किया है। इससे लोगों में नाराजगी है। मांग पूरी होने तक किसान पीछे हटने वाले नहीं हैं। वहां से हटने के बाद हम लोग कयाबांधा गांव के बाहर बगीचे में इकट्ठे हुए हैं। वहां पहले भी संगठन की बैठक और धरने आदि होते रहे हैं। रविवार को वहां एक बड़ी बैठक हुई है। वहां आंदोलन की आगे की रणनीति पर शुरुआती चर्चा हुई है। रात में भी गांवों में बैठकें हुई हैं। सोमवार को कयाबांधा के बगीचे में ही सभी ग्रामीणों की एक पंचायत बुलाई गई है। इस पंचायत में आंदोलन की रणनीति और दिशा तय किया जाना है। अपनी आठ मांगों को लेकर किसानों का यह आंदोलन 3 मार्च से जारी है। 24 अप्रेल की सुबह 3.30 बजे के करीब पहुंचे प्रशासन और पुलिस के अमले ने तबसे धरने पर बैठे किसानों को NRDA परिसर से हटा दिया था। उनका सामान जब्त कर लिया गया था।
किसानाें का कहना है कि प्रशासन ने अभी तक उन लोगाें को धरना स्थल से जप्त सामानों की सूची नहीं दी है। आंदोलनकारियों ने राखी थाने से इसकी मांग भी की है। रूपन चंद्राकर का दावा है कि प्रशासन ने उनके आंदोलन से करीब 20 लाख रुपए की सामग्री अपने कब्जे में ली है। इसमें करीब एक लाख रुपए नकद, 6 कूलर, आवश्यक कागजात, टेंट, बिस्तर, माइक, साउंड, बिजली के सामान, दरी आदि शामिल है।किसानों ने बताया, रविवार को रायपुर कलेक्टर और एएसपी ने आंदोलनकारियों के एक प्रतिनिधिमंडल को मुलाकात के लिए बुलाया था। वहां पहुंचने पर उन लोगों ने सरकार का 22 अप्रैल को जारी एक आदेश की कॉपी पकड़ा दी। इसमें कहा गया कि धारा-144 लागू होने की वजह से आंदोलन नहीं किया जा सकता। आंदोलन करने के लिए विभिन्न शर्तों के साथ प्रशासन की अनुमति जरूरी होगी।