यूक्रेन और रूस की जंग को आज 101 दिन पूरे हो गए हैं। रूस ने यूक्रेन के 20% क्षेत्र पर कब्जा कर लिया है। वहीं रूसी सेना ने अब तक यूक्रेन की 24 हजार किलोमीटर सड़कों और 300 पुलों को नष्ट कर दिया है।कीव स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स (KSE) के एनालिटिक्स डिवीजन की रिपोर्ट के मुताबिक जंग में यूक्रेनी अर्थव्यवस्था को अब तक 10.55 करोड़ डॉलर (करीब 820 करोड़ रुपए) का नुकसान हुआ है। रिपोर्ट के मुताबिक, सिर्फ पिछले हफ्ते ही अर्थव्यवस्था को 8 अरब डॉलर (करीब 62 हजार 155 करोड़ रुपए) से अधिक नुकसान हुआ।
अफ्रीकी संघ के प्रमुख और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमिर पुतिन के बीच शुक्रवार को एक बैठक हुई। दरअसल, दोनों को एक दूसरे की जरूरत है, क्योंकि अफ्रीका को खाद्य सामग्री की जरूरत है और रूस को सहयोगियों की।
अफ्रीका में सूखा, आंतरिक हिंसा से पहले से ही खाद्य संकट था। युद्ध की वजह से अफ्रीका में खाद्य संकट और गंभीर होता नजर आ रहा है। ऐसे में अफ्रीका को रूस से काफी उम्मीद है। अफ्रीका के कई देश यूक्रेन और रूस पर कुछ मुख्य खाद्यों जैसे गेंहू, मक्का, खाद्य तेल जैसी चीजों के लिए काफी हद तक निर्भर थे।
यूक्रेन ने जिन इलाकों को रूसी सेना के कब्जे से वापस लिया है, वहां लोग अपने घरों में लौट रहे हैं। कीव से करीब 58 मील उत्तर-पश्चिम में कुखारी गांव में बिजली और पानी जैसी मूलभूत सुविधाओं की बहाली पर काम शुरू हो गया है।
शुक्रवार को यहां बिजली कर्मचारी ने मिसाइल हमलों में तबाह हुए बिजली के खंभों को वापस लगाया। इस दौरान कुछ लोग अपने घरों से मलबा साफ करते नजर आए। हालांकि, छोटे शहरों में लोगों को मदद देरी से मिल रही है।
जर्मन सांसदों ने शुक्रवार को एक 100 अरब यूरो (करीब 83 हजार 289 करोड़ रुपए) के प्रस्ताव को मंजूरी दी। इसका उद्देश्य सेना को तकनीकी हथियारों से लैस करना है। इस प्रस्ताव के पक्ष में 90% वोट पड़े।