पंडाल के भीतर चार पांच लाशें रखी थीं, आस -पास बैठी लड़कियां चीख चीख कर रो रही थीं। मामला रायपुर का है। दरअसल पिछले 65 दिनों से जारी मनरेगा कर्मचारियों के आंदोलन में मंगलवार को कुछ यही नजारा देखने को मिला। कर्मचारियों ने सांकेतिक तौर पर कुछ लाशें ( कफन के भीतर पुतले) रखकर रोते हुए मातम मनाया। यह संदेश देना चाहते थे कि इनकी जिंदगियों में बेरोजगारी का दर्द और मातम के सिवा कुछ नहीं। पंडाल में आने वालों से कर्मचारियों ने कहा कि अब हमारे पास इसी तरह मरने के सिवाए कुछ नहीं, इसलिए मातम मनाकर विरोध जता रहे हैं।तीन दिन पहले ही 21 लोगों को बर्खास्त किए जाने की वजह से 12 हजार कर्मचारियों का सामूहिक इस्तीफा दिया गया। लोगों के इस्तीफे का भारी-भरकम बंडल अधिकारियों को सौंप दिया गया। मनरेगा कर्मचारियों ने कहा कि अब ये आंदोलन तब तक चलेगा जब तक हमारी मांग पूरी नहीं हो जाती। कर्मचारियों ने कहा कि हमें तो नियमित किए जाने का वादा किया गया था।