छत्तीसगढ़ में सामाजिक आर्थिक सर्वे जुलाई से शुरू हो रहा है। यह अगले जून तक चलेगा। इसमें केंद्रीय सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय(Ministry of Statistics and Programme Implementation) की टीमें गांवों और शहरों में घर -घर पहुंचेंगी। इस बार ये टीमें हाईटेक तरीके से मैदान में उतरने वाली हैं। वे लोगों से जानेंगी कि उनका सामाजिक व माली स्तर कैसा है। इस बार इस विषय पर फोकस किया जाएगा कि कितने लोगों के पास अपने मकान हैं या वे आवास विहीन हैं। इसके अलावा आयुष योजना का फायदा कितने लोग उठा रहे हैं। इसकी भी जानकारी ली जाएगी।
सरकार ने 79 वें सर्वे के 17 इंडीकेटर्स तय किए हैं। इनके आधार पर ही सर्वे होगा। रिपोर्ट या डेटा कलेक्शन में कमियां सामने आएंंगी उसे 2030 तक दूर करने का टारगेट तय किया गया है। जो प्लान या काम पहले से अमल हो रहे हैं उनको और कितनी गति देने की जरूरत है। या उनमें शेड्यूल के अनुसार कितना काम बचा है अथवा नई चीजें जोड़नी है इसका भी रिपोर्ट में जिक्र किया जाएगा।
अफसरों के अनुसार दरअसल यूनाइटेड नेशंस ने जो कि-इंडीकेटर्स तय किए हैं उनमें देश या प्रदेश कहां खड़ा है इसकी जानकारी सर्वे में सामने आएगी। इसमें लोगों की आय, मूलभूत जरूरतें जैसे पानी, बिजली, आवास, भोजन, शौचालय आदि शामिल हैं। विशेषज्ञों के अनुसार यदि हम इन कि-इंडीकेटर्स को पूरा नहीं करने तो यह समझा जाएगा कि हमारे लोग हेल्दी-लाइफ नहीं जी रहे हैं। इसके पहले 78 वें राउंड का सर्वे हुआ। यह कोरोना की वजह से बीच में रोकना पड़ा था। इसकी रिपोर्ट अभी नहीं आई है। यह सर्वे डोमेस्टिक टूरिज्म पर केंद्रित था।विभाग के अफसरों को दिल्ली बुलाकर ट्रेंड कर मास्टर ट्रेनर्स बनाया गया है। ये मास्टर्स ट्रेनर्स अब 9 से 11 जून तक NSO स्टेट लेवल ट्रेनिंग तेलीबांधा में एक होटल में देंगे। असिस्टेंट डायरेक्टर जॉर्ज मिंज ने बताया कि डिप्टी डायरेक्टर जनरल रोशन लाल साहू, पीआईबी के एडी सुनील तिवारी, एनएसओ वेस्टर्न जोन नागपुर के डिप्टी डायरेक्टर जनरल आरसी गौतम, राज्य योजना आयोग के सदस्य डॉ. के. सुब्रमनियम, एनएसओ के असिस्टेंट डायरेक्टर जी. मिंज सीनियर सांख्यिकी अधिकारी राजेश कुमार श्रीवास्तव आदि सर्वे के टिप्स देंगे।ट्रेंड टीमें टेबलेट लेकर हाइटेक तरीके फील्ड में उतरेंगी। वे लोगों से जानकारी लेकर ऑनलाइन टेबलेट में फीड करेंगी। सालभर में चार राउंड में सर्वे होगा। हर तीन महीने एक सर्वे पूरा किया जाएगा। रूरल और अरबन सैंपल्स तय कर लिए गए हैं। किस टीम को किस गांव या शहर में जाना है यह रोड-मैप बन रहा है। हर जिले में चार सब-राउंड होंगे। कुछ बड़े शहरों को मिलाकर ब्लॉक भी बनाए जा रहे हैं। इसकी तैयारी के लिए अक्टूबर में महाराष्ट्र, गुजरात, छत्तीसगढ़, मध्यप्रदेश के अफसरों यहां बैठक भी की थी।