कई महीनों से हसदेव अरण्य को बचाने के लिए संघर्ष कर रहे आदिवासियों के लिए प्रदेश की राजनीति अब मुखर हुई है। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कल कहा, टीएस सिंहदेव नहीं चाहते तो वहां पेड़ क्या एक डगाल भी नहीं कटेगी। अब स्वास्थ्य मंत्री टीएस सिंहदेव ने कहा है, सवाल उनके चाहने का नहीं, ग्रामीणों के संवैधानिक हित का है।
पंचायत, ग्रामीण विकास और स्वास्थ्य मंत्री टीएस सिंहदेव ने बुधवार को सोशल मीडिया पर लिखा, भूपेश भाई को हसदेव आंदोलन पर बयान के लिए आभार। लगभग 100 दिन से लगातार आंदोलनरत ग्रामीणों की बात पर उन्होंने उनके पक्ष में सहमति व्यक्त की है। प्रश्न आंदोलन कर रहे ग्रामीणजनों के व्यापक एवं संवैधानिक हित का है और उनके साथ खड़े होने पर भूपेश बघेल भाई को पुनः धन्यवाद।
इससे पहले मंत्री सिंहदेव ने कहा था, सवाल उनके चाहने या न चाहने का नहीं है। वे व्यक्तिगत रूप से चाहें कि वहां पेड़ न कटे और जिनकी जमीन जा रही है, वे अगर चाहते हैं कि वहां खदान खुले तो उनकी बात सुनी जानी चाहिए। सिंहदेव सोमवार को हसदेव अरण्य क्षेत्र के खदान प्रभावित गांव हरिहरपुर पहुंचे थे। वहां कई गांवों के लोग खदानों के विरोध में धरना दे रहे हैं। सिंहदेव ने ग्रामीणों के आंदोलन से एकजुटता दिखाई। कहा, अगर गांव के लोग एक राय रहे तो उनकी जमीन कोई नहीं छीन सकता। सिंहदेव ने यह भी कहा, कोयले के लिए इतने समृद्ध जंगलों का विनाश नहीं होना चाहिए।आंदोलन के राजनीतिक नफा-नुकसान देखकर अब तक चुप बैठी रही भाजपा भी खुलकर मैदान में आ गई है। हालांकि भाजपा हरिहरपुर में चल रहे आंदोलन से दूर रहने की भी कोशिश में है। पार्टी वहां अपने धड़े का आंदोलन खड़ा करने की तैयारी में है। भाजपा का एक प्रतिनिधिमंडल रविवार को हसदेव अरण्य क्षेत्र गया था। पूर्व मंत्री बृजमोहन अग्रवाल, सांसद रामविचार नेताम, केदार कश्यप आदि नेताओं ने वहां आंदोलन वाले गांव हरिहरपुर से थोड़ी दूर बसे घाटबर्रा गांव में एक बैठक की। बृजमोहन अग्रवाल ने मंगलवार को कहा, नियम कायदे और कानून कहते हैं कि राज्य सरकार अगर पर्यावरण मंजूरी ना दें और राज्य सरकार न चाहे तो कोई भी उनके क्षेत्र में खनन नहीं कर सकता।
