इटली में खेला जाएगा छत्तीसगढ़ का गुलाल:दुर्ग में महिलाएं कर रहीं तैयार

इटली में खेला जाएगा छत्तीसगढ़ का गुलाल:दुर्ग में महिलाएं कर रहीं तैयार

छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल बुधवार को दुर्ग जिले के पाटन तहसील के प्रवास पर पहुंचे। सबसे पहले वो सांकरा में संचालित रूरल इंडस्ट्रियल पार्क गए। इस पार्क का उन्होंने निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने यहां फूलों से बनाए जा रहे गुलाल व अन्य प्रोडक्ट को देखा। मुख्यमंत्री ने कहा कि सांकरा ग्राम संगठन की दीदियां आज अपना प्रोडक्ट विदेशों में एक्सपोर्ट करके मुनाफा कमा रही हैं। यहां की दीदियों ने 34 लाख रुपए के गुलाल का कंसाइनमेंट इटली एक्सपोर्ट किया है। मुख्यमंत्री ने हरी झंडी दिखाकर इस कंसाइनमेंट को रवाना किया और अच्छे कार्य के लिए ग्राम संगठन की महिलाओं को शाबासी दी है।

सांकरा में हो रहे कार्यों के संबंध में जानकारी देते हुए जिला पंचायत सीईओ अश्वनी देवांगन ने बताया कि इस कंसाइनमेंट से लगभग डेढ़ लाख रुपए का लाभांश स्व सहायता समूह की 58 महिलाओं को मिला है। उन्हें हर दिन 200 रुपए का मानदेय मिल रहा है। इसके अलावा उन्हें गुलाल के पैकेट तैयार करने पर प्रति पैकेट 70 पैसे का लाभांश दिया जा रहा है। आज इटली के लिए लगभग एक लाख 80 हजार पैकेट गुलाल भेजा गया है। यहां जिले के मंदिरों में आने वाले फूलों को इकट्ठा कर इनसे गुलाल बनाने का कार्य किया जाता है। सांकरा में इसकी मेजर यूनिट है। इसके साथ ही नंदोरी, सेलूद कोनारी, मोहलाई आदि में भी महिलाएं यह कार्य कर रही हैं। अब छत्तीसगढ़ का गुलाल इटली में भी अपनी खुशबू बिखेरेगा।

कलेक्टर डॉ. एसएन भुरे ने बताया कि सांकरा की ग्राम संगठन की महिलाओं द्वारा उत्पादित गुलाल का एक्सपोर्ट इटली के अलावा यूरोपियन यूनियन के अन्य देशों में भी किया जाना है। देश में भी इसकी आपूर्ति की जा रही है। इसमें सबसे अधिक मांग दिल्ली और बेंगलुरु से है।जिला पंचायत सीईओ ने बताया कि संगठन की महिलाओं का लाभांश अधिक हो, इसके लिए गुलाल के साथ-साथ अष्टगंध को बनाने पर भी जोर दिया जा रहा है। क्योंकि दुनिया भर में भारतीय के बने अष्टगंध और गुलाल की मांग बहुत अधिक है। इस्कॉन के केंद्रों में इसकी प्रमुख रूप से मांग होती है। इसके अलावा त्योहारों के मौके पर भी भारतीय कम्युनिटी द्वारा दुनियाभर में गुलाल एवं अष्टगंध का उपयोग किया जाता है।पाटन पहुंचे मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने वहां चल रहे नरवा प्रोजेक्ट के बारे में जानकारी ली और उसे देखा। कलेक्टर ने उन्हें बताया कि मानसून लेट होने से नरवा प्रोजेक्ट के फिनिशिंग में कुछ मदद मिल जाएगी। सीएम ने कहा जहां मुरुम की मिट्टी होती है वहां पानी का बहाव तेज हो जाता है। इसलिए वहां पानी के ठहराव के लिए थोड़ी-थोड़ी दूरी पर स्ट्रक्चर बनाना जरूरी है। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से कहा कि बारिश की हर बूंद कीमती है। नरवा प्रोजेक्ट्स का बारीक मॉनिटरिंग करें। इस दौरान मुख्यमंत्री ने ग्राम खुड़मुड़ी अंतर्गत रूही से उफरा तक बने 7.3 किलोमीटर लंबे नाला का निर्माण कार्य देखा। इसका निर्माण 95.96 लाख की लागत से हो रहा है। इससे लगभग 70 एकड़ रकबे की सिंचाई क्षमता बढ़ेगी।

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