पर्यावरण को बेहतर बनाए रखने छत्तीसगढ़ को जल्द एडवांस केंद्रीय पर्यावरण लैब के तौर पर बड़ी सुविधा मिलने वाली है। यहां 37 करोड़ रुपए की लागत से ऐसी अत्याधुनिक केंद्रीय पर्यावरण लैब बनाई जा रही है, जिसमें हवा, पानी और मिट्टी की ऐसी 138 एडवांस जांचें हो सकेंगी, जिनके लिए छत्तीसगढ़ अभी अन्य राज्यों के भरोसे है।
अभी प्रदेश में हवा, पानी और मिट्टी की केवल सामान्य जांच ही हो रही है। इस लैब से ध्वनि प्रदूषण, सॉलिड वेस्ट प्रदूषण, बैक्टिरियालॉजिकल प्रदूषण, वाहनों के धुएं, टॉक्सीसिटी और मिट्टी से खाद्य पदार्थों तक जाने वाले विषैले तत्वों की जांच भी हो सकेगी।
खास बात ये है कि यहां सरकारी सैंपल तो जांचे ही जाएंगे, आम लोग, किसान और निजी संस्थाएं भी जांच करवा सकेंगी। केंद्रीय पर्यावरण लैब से प्रदेश की आबोहवा को बेहतर बनाने में इसलिए मदद मिलेगी, क्योंकि इससे हर तरह के प्रदूषण का तुरंत पता लगाया जा सकेगा।
बारीकी से जांच होने से पर्यावरण कानूनों का अनुपालन भी बेहतर तरीके से हो सकेगा। केंद्रीय लैब के मॉनिटरिंग सिस्टम से प्रदेश के सभी जिले और इलाके सीधे तौर पर जुड़े रहेंगे। इस अत्यानुधिक लैब में करीब 25 करोड़ से अधिक की 40 तरह की एडवांस मशीनें रहेगी।
जिनसे लैब में 138 से ज्यादा तरीकों की जांच मुमकिन हो सकेगी। इसमें पानी की क्वालिटी से जुड़े 72 से ज्यादा, मिट्टी की गुणवत्ता से जुड़े 29 से अधिक, एयर क्वालिटी की जांच के लिए 17 से ज्यादा टेस्ट हो सकेंगे। यही नहीं लैब में मिट्टी, हवा, पानी में घुलने मिलने वाले हैवी मेटल तत्वों की जांच भी हो सकेगी।
विभिन्न स्त्रोतों के जरिए निकलने वाले जहरीले पदार्थों की 14 तरह की जांच भी यहां मुमकिन होगी। वहीं मिट्टी ,हवा और पानी में मिलने वाले लिचेट (टीसीएलबी), मेटल, पेस्टिसाइड, कोरियोसिटी, रिएक्टिविटी और टॉक्सीसिटी जैसे खतरनाक अपशिष्टों की जांच भी यहां हो सकेगी।
पर्यावरण के जानकारों के मुताबिक प्रदेश की आबोहवा में पर्यावरण के लिहाज से क्या खतरे हैं? टेस्ट के जरिए इस एडवांस लैब में वक्त रहते ही पता चल जाएगा। सेहत के लिहाज से भी ये लैब फायदेमंद रहेगी। क्योंकि विषैले तत्वों का पता चल गया तो निदान भी तत्काल हो सकेगा।