फ्लाई ऐश का उपयोग अनिवार्य:प्रदेश में थर्मल प्लांट से 300 किमी दायरे के सभी निर्माण में फ्लाई ऐश जरूरी

फ्लाई ऐश का उपयोग अनिवार्य:प्रदेश में थर्मल प्लांट से 300 किमी दायरे के सभी निर्माण में फ्लाई ऐश जरूरी

कोयले से बिजली बनाने वाले हर थर्मल पॉवर प्लांट से निकलने वाली राख (फ्लाई ऐश) के फैलाव को रोकने के लिए अब प्लांट से 300 किमी दायरे में होने वाले सभी तरह के निर्माण में फ्लाई ऐश का उपयोग अनिवार्य कर दिया गया है।

राज्य शासन ने केन्द्रीय पर्यावरण मंत्रालय की इस गाइडलाइन का सभी नगरीय निकायों में सख्ती से पालन करने के निर्देश दिए हैं। इस नियम की खास बात ये है कि जो थर्मल प्लांट फ्लाई ऐश निकाल रहे हैं, उन्हें कहा गया है कि 300 किमी दायरे के किसी भी निर्माण साइट पर फ्लाई ऐश मुफ्त पहुंचाकर दें।

छत्तीसगढ़ के कई इलाकों में भी राखड़ (फ्लाई ऐश) बड़ी समस्या बनती जा रही है। यहां जितनी मात्रा में राखड़ निकल रही है उसकी तुलना में उसका उपयोग नहीं हो पा रहा है इसे ध्यान में रखते हुए नगरीय प्रशासन विभाग ने सभी निकायों को इस संबंध में एक चिट्‌ठी भी जारी की है। बताया गया है कि भारत सरकार के वन एवं पर्यावरण मंत्रालय द्वारा सभी प्रकार के निर्माण कार्यों में राख आधारित उत्पादों तथा भवन निर्माण सामग्रियों के उपयोग को अनिवार्य किया गया है।

इसमें कहा गया है कि फ्लाई ऐश के उपयोग से उपजाऊ मिट्‌टी को संरक्षित किया जा सकेगा साथ ही सड़क बनाने, सड़क एवं फ्लाई ओवर की रेलिंग बनाने, तटरेखा की सुरक्षा के उपाय तथा सभी प्रकार की परियाेजनाओं के निचले क्षेत्रों को भरने के साथ ही खदानों को मिट्‌टी की बजाय राख से ही भरने के विकल्प के रुप में इसका उपयोग किया जाए।थर्मल प्लांट के दायरे में आने वाले सभी ‌भवन निर्माण परियोजनाएं जिनमें केन्द्रीय, राज्य और स्थानीय प्राधिकरणों, सरकारी उपक्रमों, अन्य सरकारी अभिकरण तथा सभी निजी अभिकरण शामिल हैं उन सभी में राख की ईटें, टाईल्स, धातुमल राख अथवा अन्य राख आधारित उत्पादों का उपयोग करना जरूरी होगा। लेकिन इसके लिए शर्त यह रखी गई है कि उस दायरे में मौजूद अन्य वैकल्पिक उत्पादों से राख की कीमत कम हो।जानकारी के मुताबिक एक मेगावाट बिजली बनाने में लगभग 15 टन कोयले की जरूरत होती है जबकि बिजली बनने के बाद औसतन 5 टन राखड़ (फ्लाई ऐश) निकलती है। बताया गया है कि एनटीपीसी की सबसे बड़ी उत्‍पादन इकाई से लगभग 16 हजार टन राखड़ रोज निकल रही है। इसके भंडारण की समस्‍या के कारण आसपास का इलाका सतह के ऊपर ही नहीं, भीतर भी दूषित होता जा रहा है।

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