छत्तीसगढ़ में कोरोना का बढ़ा हुआ संक्रमण डेल्टा वैरिएंट की वजह से है। स्वास्थ्य अधिकारियों का कहना है यह कम खतरनाक है, लेकिन संक्रमण का खतरा इसमें ज्यादा है। यह कमजोर इम्यूनिटी वालों को तेजी से शिकार बना रहा है। यानी बुजर्गों, किडनी, हार्ट और लीवर की गंभीर बीमारियों से जूझ रहे लोगों, बच्चों और गर्भवती महिलाओं को अधिक खतरा है। एक गंभीर बात जो सामने आई है वह यह कि अभी कोरोना से मरने वालों में 50% लोगों ने कोरोनारोधी टीके का एक भी डोज नहीं लगवाया है।
छत्तीसगढ़ में महामारी नियंत्रण विभाग में संचालक डॉ. सुभाष मिश्रा कहते हैं, जुलाई में हुई मौतों की एक सामान्य बात देखी गई है। इसमें मरने वाले अधिकतर लोग गंभीर बीमारियों से पीड़ित रहे हैं। उनकी प्रतिरोधक क्षमता कमजोर है, ऐसे में कोरोना का संक्रमण उनके लिए घातक साबित हुआ है। पिछले दिनों 38 साल के युवक की मौत हुई। वह किडनी की गंभीर बीमारी से पीड़ित था। अस्पताल में उसका डायलिसिस चल रहा था। डॉ. मिश्रा ने बताया कि डेथ ऑडिट में एक और बात सामने आई है। पिछले सप्ताह एक ही दिन में 7 मौतें हुई थीं।
उसमें से तीन को टीके की दोनों डोज लगा था। एक को एक ही डोज लगा था, लेकिन तीन लोगों ने टीके की एक भी डोज नहीं लगवाया। डॉक्टरों का कहना है, यह लापरवाही कमजोर प्रतिरोधक क्षमता वालों पर भारी पड़ सकती है। फिलहाल टीके के तौर पर हमारे पास सुरक्षा की एक अतिरिक्त परत मौजूद है। वह आसानी से उपलब्ध है और उसके साइड इफेक्ट अभी तक सामने नहीं आए हैं। ऐसे में उससे संकोच करने की जरूरत नहीं है। सभी को टीके की दोनों डोज लगवा लेना चाहिए। दूसरे डोज लिए हुए छह महीने से अधिक हो गए उन्हें बूस्टर डोज भी लगवा लेना चाहिए। अब यह टीके सभी सरकारी केंद्रों पर नि:शुल्क लगाए जा रहे हैं।छत्तीसगढ़ में कई महीनों बाद जुलाई में कोरोना से हो रही मौतों का ग्राफ बढ़ा है। 24 जुलाई तक प्रदेश में 20 मरीजों की मौत हो चुकी है। इसमें से 18 लोगों को किडनी, लीवर, लंग्स या दिल की घातक बीमारी थी। कोरोना संक्रमण की चपेट में आने की वजह से उनकी स्थिति चिंताजनक हो गई। बाद में उन्होंने इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। अब तक प्रदेश के 14 हजार 57 लाेगों की जान इस महामारी की वजह से जा चुकी है।