अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन ने गुरुवार देर रात चीन के प्रेसिडेंट शी जिनपिंग से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए बातचीत की। इस दौरान दोनों लीडर्स फेस-टू-फेस मिलने के लिए सहमत हुए। बाइडेन के राष्ट्रपति पद संभालने के बाद दोनों नेताओं की ये पहली व्यक्तिगत बैठक होगी। हालांकि बैठक कब और कहां होगी, इस बारे में फिलहाल जानकारी नहीं दी गई है।
न्यूज एजेंसी ‘रॉयटर्स’ के मुताबिक, ताइवान में अमेरिकी दखलंदाजी से नाराज चीनी राष्ट्रपति ने बाइडेन को एक तरह से सीधी धमकी दे दी। जिनपिंग ने कहा- मैं आपसे सिर्फ इतना कहूंगा कि जो लोग आग से खेलने की कोशिश करते हैं, वो जल जाते हैं।
इस वॉर्निंग के सीधे मायने ये हैं कि दोनों देशों के बीच कड़वाहट तेजी से बढ़ रही है। चीन को यह कतई मंजूर नहीं है कि अमेरिका और बाइडेन एडमिनिस्ट्रेशन ताइवान की मदद करे।
माना जा रहा है कि अमेरिकी संसद की स्पीकर नैंसी पेलोसी अगले हफ्ते ताइवान के दौरे पर जा रही हैं। 25 साल बाद अमेरिका का कोई इतना बड़ा नेता ताइवान की ऑफिशियल विजिट पर जा रहा है। यह चीन के लिए साफ संकेत है कि अमेरिका अब ताइवान को अकेले नहीं छोड़ेगा और उसको हर स्तर पर मदद देगा। चीन को यह सख्त नामंजूर है। यही वजह है कि चीन कई दिनों से अमेरिका को नतीजे भुगतने की धमकी दे रहा है।
दूसरी तरफ, अमेरिका ने भी साफ कर दिया है कि वो किसी सूरत में कदम पीछे नहीं खींचेगा। 23 मई को बाइडेन ने चीन के खिलाफ मिलिट्री एक्शन लेने की चेतावनी दी थी। गुरुवार को बाइडेन-जिनपिंग की मुलाकात में भी रिश्तों की यह तल्खी साफ दिखी।कहा जा रहा है कि अमेरिकी फौज ने नैंसी पेलोसी को फिलहाल, ताइवान न जाने की सलाह दी है। फौज का मानना है कि यूक्रेन और रूस के बीच जंग चल रही है और ऐसे में अगर ताइवान में कोई संघर्ष होता है तो यह मामला बेहद खतरनाक साबित हो सकता है।चीन वन-चाइना पॉलिसी के तहत ताइवान को अपना हिस्सा मानता है, जबकि ताइवान खुद को एक स्वतंत्र देश की तरह देखता है। चीन का लक्ष्य ताइवान को उनकी राजनीतिक मांग के आगे झुकने और चीन के कब्जे को मानने के लिए ताइवान को मजबूर करने का रहा है।