राजीव गांधी न्याय योजना की दूसरी किश्त जारी:CM ने 26 लाख किसानों के खाते में 1750 करोड़ ट्रांसफर किए

राजीव गांधी न्याय योजना की दूसरी किश्त जारी:CM ने 26 लाख किसानों के खाते में 1750 करोड़ ट्रांसफर किए

मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने शनिवार को न्याय योजनाओं के लिए एक हजार 750 करोड़ रुपए की अधिक की राशि जारी की। इसमें राजीव गांधी किसान न्याय योजना के तहत 2021 की दूसरी किश्त भी शामिल है। पिछले साल की पहली किश्त 21 मई को जारी की गई थी। कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर इस योजना के लिए मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और राज्य सरकार की तारीफ की है।

मुख्यमंत्री निवास में आयोजित सादे समारोह में मुख्यमंत्री ने राजीव गांधी किसान न्याय योजना की खरीफ वर्ष 2021 की दूसरी किश्त जारी की। इसके तहत 26 लाख 21 हजार किसानों को इनपुट सब्सिडी के रूप एक हजार 745 करोड़ रूपए की राशि उनके बैंक खातों में ट्रांसफर की गई। इससे पहले 21 मई को योजना की पहली किश्त में एक हजार 745 करोड़ रूपए का भुगतान किया गया था। मुख्यमंत्री ने बताया, किसानों को फसल लागत मूल्य कम करने,उत्पादकता बढ़ाने, फसल विविधीकरण को बढ़ावा देने के लिए इनपुट सब्सिडी की यह राशि दी जा रही है।

मुख्यमंत्री ने गोधन न्याय योजना से जुड़े लोगों को भी 5 करोड़ 24 लाख रुपए का भुगतान किया है। इस रकम मे से गोबर विक्रेताओं को 2 करोड़ 64 लाख रुपए तथा गौठान समितियों तथा स्व-सहायता समूह को 2 करोड़ 60 लाख रुपए का भुगतान किया गया है। गोधन न्याय योजना से 2 लाख 52 हजार से अधिक पशुपालक ग्रामीण गोबर बेच कर सीधे लाभान्वित हो रहे हैं। इनमें एक लाख 43 हजार से अधिक भूमिहीन लोग शामिल हैं। छत्तीसगढ़ की गोधन न्याय योजना के तहत सरकार गौठानों के जरिए दो रुपए प्रति किलो की दर से गोबर तथा 4 रुपए लीटर की दर से गौमूत्र की खरीदी कर रही है।शनिवार को जारी रकम को मिलाकर राजीव गांधी न्याय योजना शुरू होने से अब तक 14 हजार 665 करोड़ रुपए का भुगतान किसानों काे इनपुट सब्सिडी के तौर पर किया जा चुका है। योजना 2019 में शुरू हुई। उस साल 18 लाख 43 हजार किसानों को 4 किश्तों में इनपुट सब्सिडी के रूप में 5 हजार 627 करोड़ रुपए का भुगतान किया गया। वहीं 2020 में 20 लाख 59 हजार किसानों को 5 हजार 553 करोड़ रुपए की इनपुट सब्सिडी दी गई।

गोधन न्याय योजना से जुड़े लोगों को ही अब तक 335 करोड़ 24 लाख रुपए का भुगतान किया जा चुका है। यह योजना जुलाई 2020 में शुरू की गई थी। तबसे अब तक गोबर बेचने वालों को ही 155 करोड़ 60 लाख रुपयों का भुगतान किया जा चुका है। योजना का प्रबंधन करने वाली गौठान समितियों तथा स्व-सहायता समूह को अब तक 154.02 करोड़ रुपयों का भुगतान हुआ है। इनमें से गौठानों से जुड़ी महिला समूहों की ही 78 करोड़ 62 लाख रुपए की आमदनी हो चुकी है। प्रदेश भर में अभी 8 हजार 408 गौठान बन चुके हैं।

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