सुप्रीम कोर्ट में केस की लिस्टिंग को लेकर दो जजों ने चीफ जस्टिस यू यू ललित पर सवाल उठाए हैं। जस्टिस संजय किशन कौल और अभय एस ओका की बेंच ने लिस्टिंग सिस्टम की आलोचना करते हुए एक सुनवाई के दौरान कहा- दोपहर के सेशन में मामलों की भरमार हो जाती है। इसकी वजह से फैसला करने के लिए समय ही नहीं मिल रहा। उन्होंने इसके लिए नई लिस्टिंग प्रणाली को जिम्मेदार ठहराया है।
चीफ जस्टिस यूयू ललित ने जो नई प्रणाली लागू की है उसमें सुप्रीम कोर्ट के सभी 30 जजों के लिए दो शिफ्ट बना दिए गए हैं। इस नई व्यवस्था के तहत सोमवार से शुक्रवार तक वो नए-नए मामलों की सुनवाई के लिए 15 अलग-अलग पीठों में बैठते हैं और हर दिन 60 मामलों की सुनवाई करते हैं।
तीन-तीन जजों की बेंच में सभी जजों ने मंगलवार, बुधवार और गुरुवार को सुबह 10.30 बजे से दोपहर 1 बजे की पहली शिफ्ट में पुराने मामलों की सुनवाई की थी। उन दिनों दोपहर बाद की दूसरी शिफ्ट में दो-दो जजों की बेंच को 30 केस दिए गए जिनकी सुनवाई दो घंटे में करनी थी। यानी, औसतन 4 मिनट में एक केस का निपटारा कर देना था।
हालांकि, सीजेआई ने मंगलवार से 30 की जगह केसों की संख्या घटाकर 20 कर दी थी, यानी अब 120 मिनट में 20 केसों की सुनवाई होगी। इसके बाद मामलों की सुनवाई कर रहे जजों ने कहा – जिन मामले की फाइल पढ़ ली है। उनके बारे में एडवोकेट को यह उम्मीद नहीं करनी चाहिए कि इसे फिर से पढ़ने के लिए समय देंगे।