छत्तीसगढ़ सरकार ने बिलासपुर हाईकोर्ट के उस फैसले को लागू कर दिया है, जिसमें 58% आरक्षण के प्रावधान को पलट दिया था। यानी अब सरकारी भर्तियों में आरक्षण अनुसूचित जनजाति को 20%, अनुसूचित जाति को 16% और अन्य पिछड़ा वर्ग को 14% के अनुपात में आरक्षण मिल पाएगा। इस बीच सुप्रीम कोर्ट में सामाजिक कार्यकर्ता बी.के. मनीष की अपील पर सुनवाई की तारीख तय हो गई है। इस अपील पर पहली सुनवाई 14 अक्टूबर को होगी।
याचिकाकर्ता बी.के. मनीष ने बताया, कि याचिका 23 सितंबर को ही दाखिल हुई है। इस मामले के महत्व को देखते हुए उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में अर्जेंट हियरिंग का आग्रह किया था। मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति यू.यू. ललित ने शुक्रवार शाम इसको लिस्ट करने का फैसला किया। अपील पर सुनवाई के लिए 14 अक्टूबर की तारीख तय हुई है।
ऐसी जानकारी है कि इसी मामले में आदिवासी समाज के नेता योगेश ठाकुर और जांजगीर-चांपा जिला पंचायत की सदस्य विद्या सिदार भी दो याचिकाएं उच्चतम न्यायालय में दाखिल करेंगे। राज्य सरकार भी इस मामले की अपील करने वाली है। महाधिवक्ता सतीश चंद्र वर्मा ने बताया है, उनका कार्यालय इस मामले में व्यापक अध्ययन कर रहा है। सरकार पूरी तैयारी के साथ सुप्रीम कोर्ट में बिलासपुर हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती देगी। इस मामले में पैरवी के लिए तीन वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल, मुकुल रोहतगी और अभिषेक मनु सिंघवी का पैनल भी तय किया जा रहा है।